नई दिल्ली: बांग्लादेश अपने स्वतंत्र इतिहास में पहली बार आम चुनाव में पोस्टल बैलेट सिस्टम का इस्तेमाल करने जा रहा है. यह व्यवस्था 12 फरवरी 2026 को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में लागू की जाएगी. बांग्लादेश चुनाव आयोग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है. आयोग के अनुसार पोस्टल बैलेट की सुविधा देश और विदेश में रहने वाले नागरिकों दोनों के लिए उपलब्ध होगी.
इसके लिए अंतरराष्ट्रीय डाक सेवाओं की मदद ली जा रही है ताकि समय पर मतपत्र संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों तक पहुंच सकें. चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाने के लिए Postal Vote BD App लॉन्च किया है. मतदाताओं को सबसे पहले इस ऐप को डाउनलोड करना होगा. इसके बाद उन्हें व्यक्तिगत अकाउंट बनाकर लॉगिन करना होगा.
लॉगिन के दौरान पासपोर्ट नंबर और एक सेल्फी अपलोड करना अनिवार्य होगा. सत्यापन पूरा होने के बाद मतदाताओं को बैलेट पेपर जारी किया जाएगा. मतदाता को यह बैलेट अपने नजदीकी पोस्ट बॉक्स में डालना होगा. वहां से मतपत्र हवाई मार्ग से बांग्लादेश भेजे जाएंगे. चुनाव आयोग ने बताया कि इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए पंजीकरण 26 नवंबर 2025 से शुरू किया गया था.
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 5 जनवरी 2026 रात 11.29 बजे तय की गई है. इससे मतपत्रों के वितरण और संग्रह के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा. चुनाव आयोग के अनुसार अब तक 12 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक पोस्टल बैलेट के लिए पंजीकरण करा चुके हैं. इनमें देश के भीतर और विदेशों में रहने वाले मतदाता दोनों शामिल हैं. कुल पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 10,953 आवेदन अभी स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं.
लगभग आधे मतदाता बांग्लादेश में रहते हैं जबकि शेष विदेशों में बसे हुए हैं. बांग्लादेश दक्षिण एशिया के उन देशों में शामिल है जहां से बड़ी संख्या में लोग काम के लिए विदेश जाते हैं. खाड़ी देशों में बांग्लादेशी कामगारों की संख्या काफी अधिक है. सऊदी अरब में सबसे ज्यादा 2.6 लाख बांग्लादेशी मतदाता पोस्टल बैलेट के लिए पंजीकृत हैं.
यूनाइटेड किंगडम में 28 हजार से अधिक और अमेरिका में 29,170 मतदाता इस सूची में शामिल हैं. कतर, मलेशिया, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में भी बड़ी संख्या में पंजीकरण हुए हैं. वहीं कोलंबिया और कैमरून में केवल एक एक बांग्लादेशी मतदाता ने पंजीकरण कराया है.
दक्षिण एशिया में भारत से 297 और पाकिस्तान से 29 पंजीकरण दर्ज हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ऐप और तेज डाक सेवाओं के कारण यह व्यवस्था संभव हो पाई है.