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जेडी वेंस का बड़ा बयान, बोले- ईरान से युद्ध की वजह से हारे चुनाव, बताई हार की चार बड़ी वजह

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध, महंगाई और इजरायल से रिश्तों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने मतदाताओं की नाराजगी स्वीकार की.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
जेडी वेंस का बड़ा बयान, बोले- ईरान से युद्ध की वजह से हारे चुनाव, बताई हार की चार बड़ी वजह
Courtesy: X

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की हार के कारणों पर खुलकर बात की है. उन्होंने ईरान के साथ युद्ध और इजरायल के प्रति अमेरिकी सरकार की नीति को हार की प्रमुख वजह बताया. वेंस के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस की जोड़ी को वोट देने वाले कई मतदाताओं ने इस बार रिपब्लिकन पार्टी का साथ छोड़ दिया और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट दिया.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबे बयान में वेंस ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजह सिर्फ यह नहीं थी कि उसके समर्थक वोट डालने नहीं पहुंचे. असल समस्या यह थी कि 2024 में ट्रंप का समर्थन करने वाले कई मतदाता इस बार पार्टी के खिलाफ हो गए. उन्होंने लिखा, "हमारी हार की वजह युद्ध है." यह ट्रंप प्रशासन की ओर से अब तक का एक स्पष्ट स्वीकारोक्ति वाला बयान माना जा रहा है कि ईरान के साथ संघर्ष ने रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है.

ट्रंप के पुराने वोटर क्यों हुए नाराज?

वेंस ने बताया कि रिपब्लिकन पार्टी के डेटा विश्लेषकों ने चुनाव से पहले मतदाताओं के रुझान को समझने के लिए काफी काम किया था. पार्टी यह जानना चाहती थी कि इस बार वोट डालने वाले लोग 2024 में ट्रंप का समर्थन करने वाले मतदाताओं जैसे ही हैं या नहीं.

शुरुआती आकलन में रिपब्लिकन समर्थकों की अच्छी भागीदारी दिखाई दे रही थी. इससे पार्टी को उम्मीद थी कि वह डेमोक्रेटिक पार्टी को कड़ी टक्कर दे सकती है. हालांकि, एक डेटा विश्लेषक ने वेंस को चेतावनी दी कि ज्यादा मतदान का मतलब यह नहीं है कि लोग रिपब्लिकन उम्मीदवारों को ही वोट दे रहे हैं.

वेंस के मुताबिक, उन्होंने विश्लेषक से पूछा था कि क्या रिपब्लिकन पार्टी चुनाव की रात उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. इस पर विश्लेषक ने कहा कि पार्टी सर्वेक्षणों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन 2024 में ट्रंप-वेंस को वोट देने वाले कई लोग नाराज हैं और इस बार दूसरी पार्टी को वोट देने की योजना बना रहे हैं.

वेंस ने माना कि चुनाव परिणामों ने इस आकलन को सही साबित किया. उन्होंने फ्लोरिडा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतदाताओं का अनुपात रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में डेमोक्रेटिक पार्टी से नौ प्रतिशत अधिक था. यह अंतर 2024 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली बढ़त से बहुत ज्यादा अलग नहीं था. इससे स्पष्ट हुआ कि समस्या मतदान प्रतिशत की नहीं, बल्कि मतदाताओं की पसंद बदलने की थी.

महंगाई और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति भी बनी वजह

वेंस ने बताया कि चुनावी सर्वे करने वाले विशेषज्ञों से बातचीत में रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ नाराजगी के चार प्रमुख कारण सामने आए. इनमें सबसे बड़ी वजह ईरान युद्ध को खत्म करने की मांग थी. इसके अलावा महंगाई और रोजमर्रा की बढ़ती लागत को लेकर लोगों की चिंता भी शामिल थी. अन्य दो कारणों में ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर संदेह और इजरायल के साथ अमेरिका के रिश्तों से असंतोष शामिल था.

वेंस ने एक राजनीतिक सर्वेक्षक का भी जिक्र किया, जिसने चुनाव से पहले अनुमान लगाया था कि डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले 13 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिल सकती है. इस सर्वेक्षक ने खासतौर पर उन मतदाताओं के रुझान का अध्ययन किया था, जिन्होंने 2024 में ट्रंप को वोट दिया था, लेकिन अब डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने की योजना बना रहे थे.

डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में मिली बढ़त

मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया. यह ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है. उन्होंने इन चुनावों को अपने राष्ट्रपति कार्यकाल पर जनता के फैसले के रूप में पेश किया था.

दोनों सदनों पर नियंत्रण मिलने से डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जांच करने और अधिकारियों से जवाब मांगने की ज्यादा ताकत मिलेगी. वे ईरान युद्ध, आव्रजन नीति और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर सकते हैं. संसदीय समितियों के जरिए अधिकारियों को तलब करने और दस्तावेज मांगने का अधिकार भी उनके लिए अहम होगा.

ट्रंप ने हार की जिम्मेदारी लेने से किया इनकार

चुनाव में हार के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के खिलाफ जनता का फैसला मानने से इनकार कर दिया. फॉक्स न्यूज को फोन पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह चुनाव परिणामों को अपने ऊपर हमले के तौर पर नहीं देखते. उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था और सरकार के कामकाज के लिहाज से राष्ट्रपति पद के इतिहास के सबसे अच्छे दो साल रहे हैं.

हालांकि, ट्रंप ने भी माना कि ईरान के साथ युद्ध का चुनाव परिणामों पर असर पड़ा. इसके साथ ही उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हार के लिए जिम्मेदार ठहराया. ट्रंप ने कहा कि उम्मीदवार मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने के लिए प्रेरित नहीं कर सके. उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनका नाम बैलेट पर होता तो रिपब्लिकन समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचते. इस तरह डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत ने ट्रंप प्रशासन के सामने कार्यकाल के बाकी दो वर्षों के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है.