अमेरिका के मिशिगन राज्य में हुए सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल एल-सईद ने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम नेता बनने का गौरव हासिल किया है. अमेरिकी मीडिया नेटवर्क ने बुधवार सुबह उनकी जीत की घोषणा की. इस जीत के साथ ही अमेरिकी राजनीति में एक नया इतिहास दर्ज हो गया है.
डेट्रॉयट में अपने चुनाव मुख्यालय पर समर्थकों को संबोधित करते हुए एल-सईद ने कहा, 'मिशिगन, हमने कर दिखाया.' उनकी जीत की घोषणा होते ही वहां मौजूद सैकड़ों समर्थक खुशी से झूम उठे. कई लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर जश्न मनाया. एल-सईद ने कहा कि मिशिगन का सीनेटर-निर्वाचित होना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है.
अब्दुल एल-सईद ने मिशिगन की खाली हुई सीनेट सीट पर जीत हासिल की है. यह सीट मौजूदा सीनेटर गैरी पीटर्स के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुई थी. चुनाव के नतीजे घोषित होने के समय एल-सईद अपने प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स से करीब छह प्रतिशत अंकों की बढ़त बनाए हुए थे.
एल-सईद ने अपने चुनाव प्रचार में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों के लिए सुलभ बनाने, सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल और राजनीति में धन के प्रभाव को कम करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी. उन्होंने मतदाताओं से वादा किया कि किसी भी व्यक्ति को इलाज कराने के लिए भारी-भरकम मेडिकल बिलों का सामना नहीं करना चाहिए.
चुनाव के दौरान एल-सईद को कई तरह की राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. रिपब्लिकन नेताओं ने उनके खिलाफ इस्लामोफोबिक टिप्पणियां कीं और उन्हें आतंकवादी तक बताया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से भी उनके अरबी नाम को लेकर तंज कसे गए.
इसके अलावा, डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राथमिक चुनाव प्रक्रिया में एल-सईद से हारने वाली सांसद हेली स्टीवंस ने अंतिम समय में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन कर दिया था. इसके बावजूद एल-सईद ने अपना चुनाव अभियान जारी रखा और जीत दर्ज की.
42 वर्षीय एल-सईद ने मिशिगन के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव प्रचार किया. उन्हें उन क्षेत्रों में भी समर्थकों का साथ मिला, जहां रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक प्रभाव रहा है. उनके अभियान को श्रमिक संगठनों, यूनियन कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया से जुड़े प्रभावशाली लोगों का भी समर्थन मिला.
उनकी जीत पर 75 वर्षीय ट्रुनेटा रोच ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें युवा मतदाताओं की भागीदारी को लेकर चिंता थी, लेकिन लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान कर उनकी उम्मीदों को सही साबित किया.
अब्दुल एल-सईद की जीत के साथ अमेरिकी सीनेट में 1969 के बाद पहली बार कोई डेमोक्रेटिक डॉक्टर भी पहुंचेगा. उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अपने विजय भाषण में एल-सईद ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान के तहत उन्हें जनवरी में सीनेटर पद की शपथ दिलानी होगी. उन्होंने कहा कि अब वह मिशिगन के लोगों की आवाज बनकर सीनेट में काम करेंगे.