अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी सीनेट में फिर से अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है. चुनाव नतीजों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके प्रशासन के लिए बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है.
इस बीच ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए खुद के चुनाव में उम्मीदवार नहीं होने को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने दावा किया कि अगर वह बैलेट पर होते तो उनकी पार्टी भारी बहुमत से जीत हासिल करती.
ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, 'मैं चुनाव में उम्मीदवार नहीं था और अगर होता तो हम भारी अंतर से जीतते.' उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में लोगों का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करने की बात भी कही. ट्रंप की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी रिपब्लिकन पार्टी को चुनौती दी, जहां ट्रंप ने खुद चुनाव प्रचार किया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मिडटर्म चुनाव के परिणामों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह चुनाव परिणामों को स्वीकार करेंगे और डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर काम करने की कोशिश करेंगे.
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेगी और दोनों पक्ष किसी न किसी समाधान तक पहुंचने की कोशिश करेंगे. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने संकेत दिया था कि अगले दो वर्षों में वह अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करके डेमोक्रेट्स के एजेंडे को रोक सकते हैं.
2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी सीनेट में दोबारा बहुमत हासिल कर लिया है. इससे रिपब्लिकन पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है. चुनाव में टेक्सास, नॉर्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना और ओहायो जैसे राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत को अहम माना जा रहा है. इन राज्यों में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में जोरदार प्रचार किया था.
वहीं, प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी डेमोक्रेट्स ने सात सीटों पर बढ़त या जीत दर्ज की है. हालांकि, इस सदन में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा, इसे लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है.
चुनाव परिणामों के पीछे बढ़ती महंगाई, ईरान के साथ युद्ध और सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर मतदाताओं की नाराजगी को अहम कारण माना जा रहा है. इन मुद्दों ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाईं. डेमोक्रेट्स ने इन चिंताओं को चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुखता से उठाया और इसका उन्हें फायदा मिला.
सीनेट में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण वापस आने से राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दो साल की राजनीति प्रभावित हो सकती है. अब उनके कई महत्वपूर्ण फैसलों और नीतिगत एजेंडे को सीनेट में विरोध का सामना करना पड़ सकता है. खासकर सुप्रीम कोर्ट में रूढ़िवादी विचारधारा को मजबूत करने की उनकी कोशिशों पर भी असर पड़ने की आशंका है.
ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह डेमोक्रेट्स के प्रस्तावों को रोकने के लिए अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करेंगे. ऐसे में अमेरिकी संसद और राष्ट्रपति के बीच टकराव बढ़ सकता है. चुनाव के नतीजों ने वॉशिंगटन की राजनीति में सत्ता का संतुलन बदल दिया है और आने वाले दो साल में अमेरिकी सरकार के कामकाज पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.