नई दिल्ली: उत्तरी नाइजीरिया एक बार फिर भीषण हिंसा की आग में जल उठा है. शनिवार शाम भारी हथियारों से लैस बंदूकधारियों ने कासुवान-दाजी गांव पर हमला कर दिया. इस हमले में कम से कम 30 ग्रामीणों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोगों का अपहरण कर लिया गया है. नाइजीरिया में ऐसर पहली बार नहीं हुआ है. दर्जनों बार कई लोग यहां अपहरण कर गायब हो जाते हैं. यहां के लोगों के लिए अब एक आम बात बन चुकी है.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर जंगलों से आए और उन्होंने आते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. हमलावरों का मकसद सिर्फ हत्याएं करना नहीं था, बल्कि तबाही मचाना भी था. उन्होंने गांव के स्थानीय बाज़ार और कई घरों को आग के हवाले कर दिया.
मौत का आंकड़ा: पुलिस ने 30 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 37 से 40 के पार हो सकती है.
अपहरण: बंदूकधारियों ने कई महिलाओं और बच्चों को अगवा कर लिया है.
तबाही: पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण अपने परिजनों के शव लेने जाने से भी डर रहे हैं.
ग्रामीणों का आरोप है कि हमले की भनक प्रशासन को पहले से थी. हमले से करीब एक हफ्ते पहले इन बंदूकधारियों को पास के इलाकों में देखा गया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. पुलिस का दावा है कि उन्होंने इलाके में फोर्स तैनात कर दी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि रविवार तक वहां कोई सुरक्षाकर्मी नहीं पहुंचा था.
पुलिस के अनुसार, हमलावर 'नेशनल पार्क' के घने जंगलों से आए थे. नाइजीरिया के ये विशाल और सुनसान जंगल अब सशस्त्र गिरोहों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन गए हैं. अपराधी यहां छिपकर हमले की साजिश रचते हैं और फिरौती के लिए लोगों को उठा ले जाते हैं.
नाइजीरिया में इस तरह के हमले अब आम हो गए हैं. पिछले नवंबर में भी इसी इलाके के पास एक कैथोलिक स्कूल से 300 से ज्यादा बच्चों का अपहरण किया गया था. सरकार की सीमित मौजूदगी के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग लगातार इन खूनी गिरोहों का शिकार बन रहे हैं.