देश में पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती खपत को कम करने के लिए पीएम मोदी ने हाल ही में लोगों से अपील की थी. उनकी बात पर अमल करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तुरंत पेट्रोल-डीजल वाहन छोड़ इलेक्ट्रिक कार को अपना लिया. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब लोग पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करें और इलेक्ट्रिक वाहनों, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें. उन्होंने खुद के उदाहरण के जरिए लोगों को समझाने की कोशिश की कि छोटे-छोटे बदलाव भी देश के लिए बड़ा असर डाल सकते हैं.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह खुद इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल कर रहे हैं. मंत्री ने कहा कि भारत को भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से अपनाना होगा. उनके मुताबिक, इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि सरकार भी लगातार ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर काम कर रही है.
#WATCH | Delhi: On PM Narendra Modi's appeal to citizens to reduce petrol and diesel consumption, Union Minister Giriraj Singh says, "This is an electric vehicle. Prior to this, I owned a small car from the same company. Today, our country needs electric vehicles; it needs… pic.twitter.com/hk48pl0aWg
— ANI (@ANI) May 11, 2026Also Read
गिरिराज सिंह ने लोगों से निजी गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने की अपील करते हुए कारपूलिंग को बढ़ावा देने की बात कही. उन्होंने कहा कि अगर एक ही दिशा में जाने वाले लोग साथ सफर करें तो ट्रैफिक और ईंधन दोनों की समस्या कम हो सकती है. इसके अलावा उन्होंने मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया. मंत्री ने कहा कि बड़े शहरों में रोजाना लाखों लीटर ईंधन सिर्फ ट्रैफिक जाम में बर्बाद हो जाता है. अगर लोग सार्वजनिक परिवहन अपनाएं तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा.
केंद्रीय मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि लोगों को सप्ताह में कम से कम एक दिन पेट्रोल और डीजल वाहनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक इस छोटे कदम को अपनाए तो देश में ईंधन की खपत में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है. उन्होंने इसे केवल सरकारी पहल नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने की जरूरत बताई. उनके मुताबिक, ऊर्जा बचत को लेकर लोगों की सोच बदलना सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा कि विकसित देशों में भी इस तरह के प्रयासों से अच्छे परिणाम मिले हैं.