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350 साल पुराना है संघर्ष, जानें साल दर साल की ज्ञानवापी की कहानी

History Of Gyanvapi: वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद हिंदुओं ने 31 साल बाद एक बार फिर ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यास जी तहखाने में पूजा-पाठ की शुरुआत कर दी है. आइए जानते हैं आखिर क्या है, 350 साल पुराना इतिहास, ज्ञानवापी में मंदिर और मस्जिद का विवाद और व्यास जी की कहानी.

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Purushottam Kumar
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हाइलाइट्स

  • वाराणसी कोर्ट ने 31 जनवरी को तहखाने में पूजा करने की अनुमति दी थी.
  • मुलायम सिंह यादव सरकार ने दिसंबर 1993 में पूजा पाठ को रुकवा दिया था

History Of Gyanvapi: वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद हिंदुओं ने 31 साल बाद एक बार फिर ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यास जी तहखाने में पूजा-पाठ की शुरुआत कर दी है. हिंदू पक्ष की मानें तो 1993 तक व्यास जी तहखाने में सोमनाथ व्यास का परिवार पूजा-पाठ करते था लेकिन दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने पूजा पाठ पर रोक लगवा दी थी. वाराणसी कोर्ट के इस फैसले को एक तरफ हिंदू पक्ष अपनी जीत बता रहे हैं तो वहीं, दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष के लोग कोर्ट के इस फैसले पर कड़ा एतराज जता रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तो यहां तक कह दिया है कि ज्ञानवापी को भी बाबरी बनाने की साजिश हो रही है. आइए जानते हैं आखिर क्या है, 350 साल पुराना इतिहास, ज्ञानवापी में मंदिर और मस्जिद का विवाद और व्यास जी की कहानी.

ज्ञानवापी का 350 साल पुराना इतिहास

ज्ञानवापी का इतिहास करीब 350 साल पुराना है. इसमें धार्मिक मान्यताएं, ऐतिहासिक दावे के साथ-साथ कई कानूनी लड़ाई शामिल हैं. आइए इसे समझने के लिए 350 साल पीछे चलते हैं. मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर हजारों साल पुराना एक शिव मंदिर स्थित था, जिसे काशी विश्वनाथ मंदिर कहा जाता था. यह मंदिर हिंदू धर्म में पवित्रतम स्थलों में से एक माना जाता है. हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब के शासनकाल में जब हिंदू मंदिरों को नष्ट कर मस्जिदों के निर्माण का अभियान चलाया गया था तक 1669 में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था. इसके बाद भी 18वीं-19वीं सदी में  हिंदू समुदाय के लोग मस्जिद के आसपास पूजा-पाठ करते रहे. इसके बाद 1930 के दशक में मस्जिद के बगल में कथित शिवलिंग पाए जाने के बाद विवाद उभरा और फिर साल 1991 में हिंदू संगठनों ने मंदिर पुनर्निर्माण की मांग को लेकर अदालत में याचिका दायर की. इसके बाद अब यह पूरा विवाद लंबा खींचता चला गया और कई कोर्ट मामलों के बाद 2023 में ज्ञानवापी परिसर में ASI सर्वे हुआ और फिर जनवरी 2024 में ASI ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद 31 जनवरी 2024 को कोर्ट ने व्यासजी तहखाने में पूजा-पाठ करने की अनुमति दी. फरवरी में तहखाने में रखी मूर्तियों की पूजा पाठ शुरू की गई जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने एक बार फिर एतराज जताया.

क्या है मंदिर और मस्जिद का विवाद

ज्ञानवापी में मंदिर और मस्जिद को लेकर तीन दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है. हिंदुओं का दावा है कि जिस जगह पर मस्जिद बनी है वहां करीब 2050 साल पहले राजा विक्रमादित्य ने भगवान विश्वेश्वर का मंदिर बनवाया था. हिंदुओं का मानना है कि वहां मुगल शासनकाल के पहले से ही भगवान शिव का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग मौजूद है. इस ज्योतिर्लिंग को देशभर में मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे पवित्र माना जाता है. हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में एक प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया गया था और उसी स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया गया था.

वहीं, दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद 1669 में बनाई गई थी और यह हमेशा से एक मस्जिद रही है. मुस्लिम पक्ष हिंदुओं को मस्जिद परिसर में पूजा करने की अनुमति देने का विरोध करते हैं. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जिस आधार पर हिंदू पक्ष मंदिर को तोड़े जाने का दावा करता है क्या वो किताबें भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार के राजपत्र हैं? 350 साल पहले किसी ने क्या लिखा क्यों लिखा, उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि लेखक का झुकाव. हम केवल सरकारी अधिसूचनाओं पर ही भरोसा कर सकते हैं. 

क्या है व्यास जी की कहानी

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के साउथ में व्यास जी का तहखाना है. जानकारी के अनुसार साल 1819 में अंग्रेजों की हुकूमत थी और वाराणसी में हिंदू-मुस्लिम के बीच दंगे हुए थे. इस दौरान विवाद को शांत करने के लिए अंग्रेजों ने ज्ञानवापी के ऊपरी हिस्से को मुस्लिमों को दे दिया और निचले हिस्से में बने तहखाने को हिंदुओं को दे दिया था. ज्ञानवापी के पास रहने वाले व्यास परिवार को इस तहखाने में पूजा-पाठ करने की जिम्मेदारी दी गई जिसके बाद व्यास परिवार 1993 तक यहां पूजा करता रहा.

सब कुछ सही चल रहा था इसी बीच 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी का विध्वंस हुआ और फिर 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने ज्ञानवापी के चारों तरफ घेराबंदी करते हुए व्यासजी तहखाने में जाने वाले रास्ते को बंद करवा दिया. इसके बाद वहां पूजा-पाठ होना बंद हो गया. इसके बाद, 2023 में कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे कराने के आदेश दिए. सर्वे के आदेश के बाद सोमनाथ व्यास जी के परिवार के सदस्य शैलेंद्र कुमार पाठक ने एक याचिका दायर कर कोर्ट से तहखाने में दोबारा पूजा-पाठ करने का अधिकार मांगा और फिर 31 जनवरी 2024 को कोर्ट ने पूजा-पाठ करने की अनुमति दे दी. कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद व्यास जी के तहखाने में अब हर रोज सुबह 2:30 से 3:30 बजे मंगला आरती, सुबह 11 से 1 बजे के बीच भोग आरती, शाम 4 बजे आरती, शाम 7 से 8 बजे के बीच में सप्तर्षि आरती और फिर रात 10 से 11:30 बजे के बीच आखिरी आरती की जा रही है.

ज्ञानवापी में हुए ASI सर्वे में क्या मिला

ज्ञानवापी परिसर में ASI ने 92 दिनों तक सर्वे किया था. सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद में स्वस्तिक के निशान, नाग देवता के निशान, कमल पुष्प के निशान, घंटी के निशान, ओम लिखा हुआ निशान, टूटी हुई विखंडित हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां भारी संख्या में मिली हैं. मंदिर के टूटे हुए खंभों के अवशेष भी मिले हैं. ज्ञानवापी परिसर में 34 जगहों पर देवनागरी, कन्नड़, तेलुगु इंस्क्रिप्शन (शिलालेख) मिले हैं. इससे पता चलता है कि मंदिर के ही हिस्से को मस्जिद बनाने में इस्तेमाल हुआ है. इस सर्वे में विभिन्न बिंदुओं पर टेंपल आर्किटेक्‍ट सामने आए हैं. ज्ञानवापी के तहखाने में सनातन धर्म से जुड़े सबूत भी मिलने का दावा किया गया है. वहीं तहखाने के अंदर खंभों पर हिंदू धर्म से जुड़ी तमाम कलाकृतियां मिली हैं.

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First Published : 02 February 2024, 06:14 PM IST