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India Daily

एथेनॉल से खराब हो रहीं गाड़ियां, बनाने में बर्बाद हो रहा हजारों लीटर पानी? वायरल दावों पर आया सरकार का बयान

सोशल मीडिया पर E20 एथेनॉल को लेकर इंजन खराब होने, अधिक पानी की खपत, वारंटी खत्म होने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने जैसे कई दावे वायरल हो रहे थे. सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर इन सभी दावों को तथ्यों के आधार पर खारिज किया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
एथेनॉल से खराब हो रहीं गाड़ियां, बनाने में बर्बाद हो रहा हजारों लीटर पानी? वायरल दावों पर आया सरकार का बयान
Courtesy: pinterest

देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 कार्यक्रम को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. सोशल मीडिया पर इसे लेकर इंजन खराब होने, माइलेज घटने, वारंटी खत्म होने और एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी खर्च होने जैसे दावे तेजी से फैल रहे थे. इन दावों के बीच शुक्रवार, 3 जुलाई को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दस अहम बिंदुओं के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि E20 से जुड़े कई वायरल दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं.

 इंजन और माइलेज पर क्या बोली सरकार

मंत्रालय ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की ओर से किए गए परीक्षणों में E20 ईंधन का गाड़ियों की सामान्य परफॉर्मेंस पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया. ट्रायल के दौरान यात्री वाहनों को करीब 40 हजार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को लगभग 20 हजार किलोमीटर तक चलाया गया. जांच में ड्राइविंग अनुभव सामान्य रहा और ईंधन दक्षता में केवल मामूली बदलाव दर्ज किया गया. मंत्रालय का कहना है कि E20 के अनुरूप तैयार वाहनों को एथेनॉल की अधिक ऑक्टेन क्षमता का लाभ भी मिल सकता है.

 जंग और इंजन खराब होने के दावों पर जवाब

इंजन खराब होने या गाड़ी के धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर असर पड़ने संबंधी दावों को भी सरकार ने खारिज किया. मंत्रालय ने बताया कि ARAI, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा किए गए अध्ययनों में ऐसी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई. हालांकि, कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ हिस्सों को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन इसे व्यापक तकनीकी खतरे के रूप में नहीं देखा गया है.

 वारंटी और इंश्योरेंस को लेकर स्थिति स्पष्ट

सरकार ने यह भी साफ किया कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहन की वारंटी या इंश्योरेंस अपने आप समाप्त नहीं होगा. मंत्रालय के अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियों और बीमा कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि जिन वाहनों को E20 के लिए डिजाइन किया गया है या मंजूरी दी गई है, वे पहले की तरह लागू वारंटी और बीमा शर्तों के तहत सुरक्षित रहेंगे. इसलिए इस संबंध में फैलाई जा रही आशंकाओं को सही नहीं माना जाना चाहिए.

 पानी की खपत पर भी सरकार का स्पष्टीकरण

एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होने के वायरल दावे को भी मंत्रालय ने गलत बताया. सरकार के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में केवल खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी होने के बाद बचा हुआ चावल इस्तेमाल किया जाता है. वहीं डिस्टिलरी में प्रति लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की जरूरत होती है. मंत्रालय ने कहा कि अधिकांश इकाइयां अब 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' प्रणाली अपना रही हैं, जिससे पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है और उसकी बर्बादी कम होती है.