महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब राज्य में किसी भी स्कूल के 500 मीटर के दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री नहीं की जा सकेगी. सरकार का कहना है कि यह कदम स्कूली बच्चों में एनर्जी ड्रिंक के बढ़ते सेवन और उसके संभावित दुष्प्रभावों को देखते हुए उठाया गया है. इस फैसले का स्वागत करते हुए कई जनप्रतिनिधियों ने इसे बच्चों के हित में जरूरी कदम बताया है.
इस फैसले की शुरुआत विधानसभा में उठे एक सवाल से हुई. बीजेपी विधायक विक्रम पचपुते ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया कि स्टिंग एनर्जी ड्रिंक बच्चों तक आसानी से पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि कंपनी के लेबल पर भी साफ लिखा होता है कि यह पेय बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है, फिर भी इसकी बिक्री पर कोई प्रभावी रोक नहीं है. उन्होंने सरकार से बच्चों को इसकी बिक्री रोकने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की.
खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने बताया कि स्कूली बच्चों पर एनर्जी ड्रिंक के असर को लेकर लगातार चिंताएं सामने आ रही थीं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फैसला किया कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्टिंग की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी. यदि कोई दुकानदार इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
विक्रम पचपुते ने कहा कि स्टिंग में लगभग 32 मिलीग्राम कैफीन मौजूद होता है. इसके साथ इसमें टॉरिन और करीब 34 प्रतिशत शुगर भी होती है. उनका कहना है कि कैफीन हृदय की धडकन बढा सकता है, जबकि अधिक शुगर और अन्य तत्व बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एनर्जी ड्रिंक पीने के बाद थोडी देर के लिए ऊर्जा महसूस होती है, लेकिन बाद में थकान बढने से इसे बार बार पीने की इच्छा हो सकती है.
बीजेपी विधायक के अनुसार किशोरों में एनर्जी ड्रिंक का सेवन तेजी से बढ़ रहा है. उनका मानना है कि इसकी आदत भविष्य में दूसरी हानिकारक लतों की ओर भी ले जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञ एक दिन में दो से अधिक एनर्जी ड्रिंक नहीं पीने की सलाह देते हैं. अधिक सेवन से हृदय संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ सकती है.
विक्रम पचपुते ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि असली चुनौती इस नियम को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा. उन्होंने मांग की कि बच्चों को किसी भी परिस्थिति में ऐसे एनर्जी ड्रिंक नहीं बेचे जाने चाहिए. उनका व्यक्तिगत मत है कि स्टिंग जैसे एनर्जी ड्रिंक बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं और सरकार को भविष्य में इस दिशा में और कडे कदम उठाने चाहिए.