लोहागढ़ किले पर हुए चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. पुलिस को मिले डिजिटल सबूतों से संकेत मिला है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी सामान्य भाषा की बजाय विशेष कोड शब्दों में बातचीत करते थे. अब जांच का केंद्र इन्हीं रहस्यमयी संदेशों को समझना बन गया है.
जांच अधिकारियों के मुताबिक, 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश को समझने के लिए दोनों आरोपियों की चैट और कॉल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई बातचीत में कई ऐसे शब्द मिले हैं जिनका सीधा अर्थ स्पष्ट नहीं हो रहा है. अधिकारियों को संदेह है कि इन शब्दों का इस्तेमाल किसी खास योजना या घटनाक्रम को छिपाने के लिए किया गया था. फिलहाल साइबर और तकनीकी टीम इन संदेशों का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हत्या से पहले और बाद में दोनों आरोपियों के बीच क्या बातचीत हुई थी.
जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल का एक और मोबाइल फोन बरामद किया है. इससे पहले गिरफ्तारी के समय सिया और चेतन के पास से एक-एक फोन जब्त किया गया था. पुलिस को उम्मीद है कि नए डिवाइस से ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं जो मामले की कई अनसुलझी कड़ियों को जोड़ने में मदद करेंगे. सरकारी पक्ष ने अदालत में बताया कि मोबाइल डेटा हाल ही में प्राप्त हुआ है और उसमें मौजूद सामग्री के आधार पर आरोपियों से विस्तृत पूछताछ अभी बाकी है. जांच एजेंसियों का मानना है कि कोड वर्ड्स का वास्तविक मतलब केवल आरोपी ही बता सकते हैं.
अभियोजन पक्ष ने पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि दोनों आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ जरूरी है. हालांकि बचाव पक्ष ने इसका विरोध किया और कहा कि पुलिस पहले भी इसी आधार पर हिरासत बढ़ाने की मांग कर चुकी है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस रिमांड बढ़ाने से इनकार कर दिया. इसके बाद सिया गोयल और चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अब जांच एजेंसियां जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से केतन अग्रवाल की हत्या से जुड़े घटनाक्रम को पूरी तरह समझने की कोशिश कर रही हैं.