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India Daily

 TMC में सियासी भूचाल! बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय पर किया कब्जा, नए पोस्टर पर ममता बनर्जी की फोटो नहीं

तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया है. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मुख्यालय के ताले बदल दिए और खुद को असली टीएमसी बताते हुए चुनाव आयोग से पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
 TMC में सियासी भूचाल! बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय पर किया कब्जा, नए पोस्टर पर ममता बनर्जी की फोटो नहीं
Courtesy: @Plchakraborty

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी संकट अब खुलकर सामने आ गया है. शुक्रवार को पार्टी के बागी गुट ने कोलकाता स्थित टीएमसी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पहुंचे नेताओं और समर्थकों ने कार्यालय के ताले बदल दिए तथा नए पोस्टर लगाए. इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रहे नेतृत्व विवाद को और गहरा कर दिया है. इससे पहले बागी गुट चुनाव आयोग में पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर भी दावा पेश कर चुका है.

 मुख्यालय से शक्ति प्रदर्शन

बागी गुट ने मुख्यालय में बैठक कर घोषणा की कि अब पार्टी की गतिविधियां यहीं से संचालित की जाएंगी. कार्यालय के बाहर लगाए गए नए पोस्टरों में ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी, हालांकि अंदर लगे उनके चित्र और कटआउट नहीं हटाए गए. बागी नेताओं का कहना है कि संगठन में हुए बदलाव के बाद वही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस कदम को पार्टी के भीतर शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है.

 चुनाव आयोग तक पहुंचा विवाद

मुख्यालय पर कब्जे से एक दिन पहले बागी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश किया था. प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को संगठन में किए गए बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की जानकारी भी दी. उनका कहना है कि पार्टी में बहुमत उनके साथ है, इसलिए उन्हें ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए. अब इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं.

 हार के बाद बढ़ी अंदरूनी खींचतान

विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आईं. बागी गुट का दावा है कि 80 में से 58 विधायक उनके साथ हैं और उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना है. विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र भी सौंपा गया, जिसके बाद उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिलने की बात कही गई. दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थक गुट के नेता कुनाल घोष मुख्यालय पहुंचे, लेकिन ताला बदला होने के कारण अंदर प्रवेश नहीं कर सके. उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय पर कब्जा प्रशासन और पुलिस की सहमति से कराया गया.

 संख्या बल को लेकर दावे तेज

बागी गुट का दावा है कि लोकसभा और राज्यसभा में भी कई सांसद उनके साथ हैं. उनके अनुसार विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन मिलने के कारण उन्हें अलग राजनीतिक दल के रूप में मान्यता मिलने का आधार भी मजबूत है. वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट इन दावों को स्वीकार नहीं कर रहा है. ऐसे में अब यह विवाद केवल संगठन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पार्टी की वैध पहचान, नेतृत्व और चुनाव चिह्न के भविष्य का फैसला भी महत्वपूर्ण हो गया है.