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न केमिकल एम्बामिंग, न दफन... 125 दिन तक अली खामेनेई का शव कैसे रहा सुरक्षित?

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 125 दिन बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई. सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार टलता रहा. अब कई शहरों में रस्में पूरी होने के बाद दफन की तैयारी है.

KanhaiyaaZee
न केमिकल एम्बामिंग, न दफन... 125 दिन तक अली खामेनेई का शव कैसे रहा सुरक्षित?
Courtesy: X

नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के करीब चार महीने बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सुरक्षा परिस्थितियों और ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान पैदा हुए हालात के कारण अंतिम संस्कार लगातार टलता रहा. अब अंतिम यात्रा कई शहरों से गुजरते हुए मशहद में दफन के साथ पूरी होगी. इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर रही कि इतने लंबे समय तक उनके पार्थिव शरीर को किस तरह सुरक्षित रखा गया.

रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में हुई थी. इसके बाद सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार कई बार स्थगित किया गया. शुक्रवार से अंतिम संस्कार की औपचारिक शुरुआत हुई. यह कार्यक्रम ईरान के कई शहरों और पड़ोसी इराक तक चलेगा. इसके बाद 9 जुलाई को मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.

पार्थिव शरीर को लेकर बना रहा रहस्य

इन महीनों के दौरान ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया कि पार्थिव शरीर कहां रखा गया था. हालांकि अंतिम संस्कार समिति के प्रवक्ता इमान अत्तरजादेह ने कहा कि पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ इस्लामी और कानूनी मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखा गया. उन्होंने कहा कि इस दौरान सभी धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा गया.

विशेषज्ञों ने बताई संभावित प्रक्रिया

विशेषज्ञों का मानना है कि पार्थिव शरीर को रासायनिक संरक्षण के बजाय अत्यधिक ठंडे तापमान वाले कोल्ड स्टोरेज में रखा गया होगा. उनका कहना है कि इस्लामी परंपरा में रासायनिक एम्बामिंग की अनुमति नहीं होती. हालांकि असाधारण परिस्थितियों में शिया धार्मिक नियमों के तहत ठंडे वातावरण में पार्थिव शरीर सुरक्षित रखने की अनुमति दी जा सकती है.

परिवार के कई सदस्य भी हुए थे हताहत

रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य भी मारे गए थे. इनमें उनकी बेटी, दामाद, बहू और एक छोटी पोती भी शामिल थीं. शुक्रवार को तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला में उनके ताबूत अन्य परिजनों के साथ रखे गए. वहां बड़ी संख्या में समर्थकों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की.

नए सर्वोच्च नेता की गैरमौजूदगी चर्चा में

अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कई ईरानी नेताओं ने भाग लिया, लेकिन खामेनेई के पुत्र और नए सर्वोच्च नेता सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए. रिपोर्टों में दावा किया गया कि युद्ध के दौरान हुए हमलों में उन्हें भी गंभीर चोटें आई थीं. हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.