नई दिल्ली: जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है. इस मामले में अब सौरव दास ने खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि केवल अभद्र भाषा का इस्तेमाल अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकता.
सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 25 वर्षीय युवती के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है. उन्होंने कहा कि पुलिस को अपनी ऊर्जा गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में लगानी चाहिए, न कि एक युवती के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई में. उन्होंने युवाओं के कथित उत्पीड़न पर भी चिंता जताई.
The misuse of criminal machinery against Ruchika Singh is unacceptable. Profanity does not attract criminal case. 50% of Lok Sabha MPs have criminal cases against them, close to 100 MPs in the BJP. The Police can focus their energy towards them, not a 25-year old! Harassment of…
— Saurav Das (@SauravDassss) July 31, 2026
पूरा मामला 23 जुलाई 2026 का है, जब दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में वह प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करती हुई दिखाई देने का दावा किया गया. वीडियो सामने आने के बाद इस पर कार्रवाई की मांग उठी.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई कथित भाषा प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध है. शिकायत में यह भी कहा गया कि इस तरह की टिप्पणी से समाज में दुर्भावना फैल सकती है और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है.
शिकायत के आधार पर 29 जुलाई 2026 को गौतमबुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे थाना में जीरो एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. चूंकि घटना दिल्ली के संसद मार्ग थाना क्षेत्र में हुई थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को भेज दिया गया. अब संसद मार्ग थाना उपलब्ध वीडियो, शिकायत और अन्य साक्ष्यों की जांच कर आगे की कार्रवाई करेगा.
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है. एक पक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल गंभीर विषय है और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानूनों के संतुलित उपयोग का मुद्दा बता रहा है.