प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने आवास पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. यह मुलाकात दिल्ली में हुई उनकी उच्च स्तरीय वार्ताओं की श्रृंखला का हिस्सा थी, जिसमें वांग यी ने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से चर्चा की थी. मोदी और वांग यी की बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन दोनों एशियाई दिग्गज देश द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाने के प्रयास कर रहे हैं.
वांग यी की यह यात्रा उस समय हुई है जब प्रधानमंत्री मोदी अगस्त के अंत में चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं. यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया है और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है.
अजीत डोभाल ने विशेष प्रतिनिधि (SR) तंत्र के तहत हुई वार्ता में कहा कि पिछले नौ महीनों में भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है. एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर शांति और स्थिरता बनी हुई है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आई है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. डोभाल ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में भारत-चीन वार्ता का महत्व और बढ़ गया है.
VIDEO | Delhi: Chinese Foreign Minister Wang Yi leaves from 7 Lok Kalyan Marg, Prime Minister Narendra Modi's official residence.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 19, 2025
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvqRQz) pic.twitter.com/Gwlzt38BEx
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को रणनीतिक संवाद के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाना चाहिए, सहयोग से साझा हितों का विस्तार करना चाहिए और सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान समझदारी से करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अब भारत-चीन संबंध सुधार और विकास के नए अवसर के दौर में हैं. वांग यी ने प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे को बेहद अहम बताते हुए कहा कि बीजिंग इस यात्रा को बड़ी अहमियत देता है.
सोमवार को हुई बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वांग यी से कहा कि भारत-चीन संबंध आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों से संचालित होने चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को टकराव नहीं बनने देना चाहिए. जयशंकर ने कहा कि कठिन दौर के बाद अब दोनों देशों को ईमानदार और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ना होगा.