नई दिल्ली: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन की बैठक में इस बार राजनीतिक चर्चा के साथ हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिले. दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मशहूर झालमुड़ी का स्वाद लिया और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत की. इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
एनडीए की अहम बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग और सहज रूप देखने को मिला. कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न राज्यों की पहचान से जुड़े व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी. इसी दौरान प्रधानमंत्री की नजर पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध झालमुड़ी पर पड़ी. उन्होंने मुस्कुराते हुए इसे लेने की इच्छा जताई, जिसके बाद वहां मौजूद नेताओं के बीच भी हंसी का माहौल बन गया. इस दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें झालमुड़ी दी.
बैठक के दौरान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है. वीडियो में प्रधानमंत्री नेताओं के साथ हल्के अंदाज में बातचीत करते दिखाई देते हैं. झालमुड़ी लेते समय उनकी प्रतिक्रिया ने लोगों का ध्यान खींचा. बाद में प्रधानमंत्री ने भी इस पल को साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने एनडीए सहयोगियों के साथ झालमुड़ी का आनंद लिया.
सीएम शुवेंदु अधिकारी पीएम नरेंद्र मोदी को झालमुड़ी खिला रहे।
— Rajesh Sahu (@askrajeshsahu) June 10, 2026
पीएम संजय निषाद का भी ख्याल रख रहे हैं।
संजय जी खाने के मामले में एकदम पीछे नहीं रहते। खाने के उनके खूब किस्से चर्चित हैं। 😅 pic.twitter.com/ZA3BrwYtr5
बैठक में मौजूद नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने की उपलब्धि के लिए बधाई दी. 10 जून तक उन्होंने 4399 दिन का कार्यकाल पूरा कर लिया. इस उपलब्धि के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके लंबे नेतृत्व और शासन शैली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और गठबंधन सहयोगी शामिल हुए. नेताओं ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना की और भविष्य में भी मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई. कार्यक्रम के दौरान समूह फोटो भी खिंचवाई गई. बैठक का माहौल औपचारिक होने के साथ-साथ सौहार्दपूर्ण भी दिखाई दिया.
प्रधानमंत्री मोदी अब लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री बन चुके हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम था. प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे स्थिर शासन, निरंतर नेतृत्व और विकास के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया है. भाजपा और एनडीए नेताओं ने भी इसे ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया.