उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को देहरादून के डीएल रोड स्थित पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट के निजी आवास पहुंचे. यहां उन्होंने दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने का संदेश देते हुए उन्हें सांत्वना दी.
मुख्यमंत्री धामी ने इससे पहले हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया था. उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा. मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की थी.
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को डी.एल रोड, देहरादून स्थित पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. हीरा सिंह बिष्ट के निजी आवास पहुँचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं… pic.twitter.com/eGFzvIBYJK
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) July 26, 2026
हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड और अविभाजित उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा रहे. वे दोनों राज्यों में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे. इसके अलावा उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. उनके निधन की खबर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई.
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक सफर वर्ष 1985 में शुरू हुआ, जब वे पहली बार देहरादून विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए विधायक चुने गए. राज्य गठन के बाद उन्होंने 2002 में राजपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और 2014 के डोईवाला विधानसभा उपचुनाव में भी विजय हासिल कर कुल तीन बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया. उनकी पहचान एक जमीनी और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में रही.
उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में हीरा सिंह बिष्ट ने कैबिनेट मंत्री के रूप में परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाला. अपने प्रशासनिक अनुभव और सरल कार्यशैली के कारण उन्होंने राजनीतिक जीवन में अलग पहचान बनाई. उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया.