नई दिल्ली: देशभर में NEET परीक्षा को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार त्वरित अदालतों की स्थापना करेगी. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब NEET को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी जारी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी अन्य विषय से अधिक महत्वपूर्ण है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी. उनका कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा.
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this…
सरकार ने फैसला लिया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे. इन अदालतों का उद्देश्य मामलों का जल्द निपटारा करना और दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना होगा. इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि जो भी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. सरकार का लक्ष्य केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना भी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके.
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब NEET परीक्षा को लेकर कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. विभिन्न राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. इसी माहौल में प्रधानमंत्री का यह बयान परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार का आधिकारिक रुख माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री की घोषणा से एक दिन पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में 150 से अधिक दस्तावेज लीक हुए, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली. इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर पेपर लीक मामलों में त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है.