menu-icon
India Daily

चीन, रूस, ईरान और भारत के अलग हित, क्या BRICS बन सकेगा दुनिया की नई बड़ी ताकत?

भारत की मेजबानी में BRICS ने नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया, लेकिन समूह के सदस्य देशों के बीच अमेरिका, चीन, ईरान और डॉलर को लेकर अलग-अलग हित हैं.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
चीन, रूस, ईरान और भारत के अलग हित, क्या BRICS बन सकेगा दुनिया की नई बड़ी ताकत?
Courtesy: X

BRICS शिखर सम्मेलन में शनिवार को नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी मिली. इसमें पहलगाम आतंकी हमले की निंदा, UNSC सुधार और ग्लोबल साउथ की भागीदारी पर जोर दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणाओं को जमीन पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई.

BRICS क्या है?

BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी. अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने 2001 में यह नाम दिया था. 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन साथ आए और 2009 में पहला शिखर सम्मेलन हुआ. 2011 में दक्षिण अफ्रीका जुड़ा और BRICS बना. जनवरी 2025 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE के शामिल होने से इसका विस्तार हुआ. बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम सहयोगी देश बने.

BRICS के सामने चुनौतियां

समूह में कई मुद्दों पर सोच अलग है. रूस, चीन और ईरान BRICS को पश्चिमी ताकतों के मुकाबले मजबूत मंच और डॉलर पर निर्भरता घटाने का माध्यम बनाना चाहते हैं. दूसरी ओर UAE और सऊदी अरब अमेरिका के करीबी साझेदार हैं और ईरान से उनके क्षेत्रीय मतभेद हैं. चीन सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है, इसलिए भारत और ब्राजील चाहते हैं कि समूह केवल बीजिंग की प्राथमिकताओं तक सीमित न रहे. भारत-चीन सीमा विवाद भी इसकी बड़ी चुनौती है.

ब्रिक्स के बारे में पश्चिमी देशों की क्या राय है?

अमेरिका में BRICS को लेकर चिंता बनी हुई है. डोनाल्ड ट्रंप इसे अमेरिका-विरोधी समूह बता चुके हैं और डॉलर को कमजोर करने की कोशिश पर 100% टैरिफ की चेतावनी दे चुके हैं. हालांकि BRICS देश कहते हैं कि यह किसी देश के खिलाफ नहीं है. मोदी ने भी कहा कि ग्लोबल साउथ को वैश्विक फैसलों में बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए. भारत 12-13 सितंबर को शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें 11 सदस्य और 10 सहयोगी देशों के नेता शामिल हैं.