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दुनिया के इन देशों में पहले से ही लागू है वन नेशन वन इलेक्शन, जानें विकास का क्या है हाल

One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव एक अच्छी अवधारणा है, लेकिन इसे लागू करने में कई चुनौतियां हैं.  एक देश, एक चुनाव की अवधारणा पर कई वर्षों से भारत में बहस और चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं ये सिस्टम किन देशों में है और वहां विकास का हाल क्या है.

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Antriksh Singh
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One Nation One Election: एक देश, एक चुनाव एक ऐसी अवधारणा है जिसमें एक ही समय में देश के सभी स्तरों (केंद्र, राज्य और स्थानीय) के चुनाव होते हैं. इस प्रस्ताव का उद्देश्य चुनावों में होने वाले खर्चों को कम करना, चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और बार-बार चुनावों के कारण होने वाली परेशानियों को कम करना है.

एक देश, एक चुनाव के फायदे:

खर्च में कमी: एक साथ चुनाव होने से चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों और सरकार के खर्च में कमी आएगी.
सुव्यवस्थित चुनाव: एक साथ चुनाव होने से चुनावी प्रक्रिया सुव्यवस्थित होगी और मतदाताओं के लिए भी सुविधाजनक होगी.
कम परेशानी: बार-बार चुनावों के कारण होने वाली परेशानियां कम होंगी.

1950 में भारत गणतंत्र बनने के बाद, 1951 से 1967 तक हर 5 साल में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे. इसका मतलब है कि 1952, 1957, 1962 और 1967 में, लोगों ने केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक साथ मतदान किया.

लेकिन 1968-69 में, कुछ पुराने राज्यों का पुनर्गठन और नए राज्यों के बनने के कारण, यह प्रणाली समाप्त हो गई. इसके बाद से, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव अलग-अलग समय पर होते रहे हैं.

एक देश, एक चुनाव: दुनिया भर में कैसे लागू होता है?

कई देशों ने चुनावों को आसान बनाने के लिए 'एक देश, एक चुनाव' मॉडल अपनाया है. आइए जानते हैं कि यह मॉडल कैसे काम करता है और कुछ देशों में इसे कैसे लागू किया गया है.

अमेरिका:

अमेरिका में राष्ट्रपति, कांग्रेस और सीनेट के चुनाव के लिए हर चार साल में एक निश्चित तारीख फिक्स है. यह सुनिश्चित करता है कि देश के सभी महत्वपूर्ण पदों के चुनाव एक साथ हों, जिससे चुनाव प्रक्रिया आसान हो जाती है. चुनाव की तारीखें संघीय कानून द्वारा निर्धारित की जाती हैं, जिससे पूरे देश में चुनाव एक साथ आयोजित होते हैं.

अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया:

प्राथमिक चुनाव: राजनीतिक दल आम चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का चयन करते हैं.

आम चुनाव: चार साल में एक बार नवंबर के पहले मंगलवार को होते हैं.

मतदाता: राष्ट्रपति, कांग्रेस के सदस्य, राज्यपाल, राज्य विधायक और स्थानीय अधिकारियों जैसे विभिन्न पदों के लिए वोट देते हैं.

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति: इलेक्टोरल कॉलेज प्रणाली का उपयोग करके चुने जाते हैं. प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर इलेक्टोरल वोट दिए जाते हैं.

विजेता: बहुमत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति बनता है. कांग्रेस के सदस्य और अन्य अधिकारी वोटों के आधार पर चुने जाते हैं.

अन्य देश:

फ्रांस: राष्ट्रपति और संसद के चुनाव हर पांच साल में एक साथ होते हैं. फ्रांस में 'एक देश, एक चुनाव' की प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति और नेशनल असेंबली के लिए एक निश्चित कार्यकाल तय करना है.

स्वीडन में चुनाव प्रणाली

स्वीडन में, संसद (Riksdag) और स्थानीय सरकार के लिए चुनाव हर चार साल में एक साथ होते हैं. नगरपालिका और काउंटी परिषद चुनाव भी राष्ट्रीय चुनावों के साथ होते हैं. इसका मतलब है कि मतदाता एक ही दिन में कई चुनावों में भाग ले सकते हैं.

इस प्रणाली को "समन्वित चुनाव" कहा जाता है. इसका मतलब है कि राष्ट्रीय और स्थानीय विधायिकाओं के कार्यकाल को एक साथ रखा जाता है. यह सुनिश्चित करता है कि सरकार के सभी स्तरों के चुनाव एक साथ हों.

कनाडा में चुनाव प्रणाली

कनाडा 'एक देश, एक चुनाव' प्रणाली का पूरी तरह से पालन नहीं करता है.

यहां, हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुनाव हर चार साल में होते हैं. यह देश को राष्ट्रीय स्तर पर एक सुसंगत चुनावी ढांचा प्रदान करता है.

इसके अलावा, कुछ प्रांत स्थानीय स्तर के चुनावों को संघीय चुनावों के साथ आयोजित करते हैं.

इन देशों में विकास का स्तर

अमेरिका, कनाडा और स्वीडन तीनों ही विकसित देश हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था और जीवन शैली में उच्च स्तर है. इन देशों में विकास के कई पहलू हैं, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, नागरिक सुविधाएं, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और पर्यावरण.

अमेरिका की जीडीपी 2023 में 23.15 ट्रिलियन डॉलर थी, जो दुनिया की सबसे बड़ी थी. अमेरिका में शिक्षा का स्तर उच्च है, और यहां के कई विश्वविद्यालय दुनिया के शीर्ष में शामिल हैं. अमेरिका ने प्रौद्योगिकी, विज्ञान, अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. अमेरिका में लोकतंत्र की परंपरा लंबी है, और यहां के नागरिकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का पूरा लाभ मिलता है. 

कनाडा की जीडीपी 2023 में 2.2 ट्रिलियन डॉलर थी. कनाडा में शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है. कनाडा में प्राकृतिक संसाधनों का बहुत भंडार है, जिससे इसकी अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है. कनाडा में लोकतंत्र का सम्मान किया जाता है, और यहां के नागरिकों को अपनी सरकार चुनने और उसे जांचने का अधिकार मिलता है. कनाडा में सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दों पर जोर दिया जाता है, और यहां के लोग विविधता को स्वीकार करते हैं. 

स्वीडन की जीडीपी 2023 में 0.59 ट्रिलियन डॉलर थी. स्वीडन में शिक्षा का स्तर बेहद उच्च है, और यहां की शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे अच्छी में से एक मानी जाती है. स्वीडन में प्रौद्योगिकी, विज्ञान, और इनोवेशन के क्षेत्र में कई उत्कृष्ट कार्य किए गए हैं, और यहां के कई कंपनियां दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. स्वीडन में लोकतंत्र की परंपरा लंबी है, और यहां के नागरिकों का अपनी सरकार पर पूरा नियंत्रण है.

फ्रांस की वर्तमान जीडीपी 2023 में 3.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी थी. फ्रांस की विकास दर 2023 में 1.7 प्रतिशत थी. फ्रांस में बेरोजगारी दर 2023 में 8.4 प्रतिशत थी. फ्रांस की आर्थिक तरक्की में पर्यटन, परमाणु ऊर्जा, विमान और क्रूज जहाज आदि का बड़ा योगदान है. फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी नेतृत्व किया है, और यहां के लोग ग्रीन एनर्जी और स्थिर विकास के पक्षधर हैं.

एक देश-एक चुनाव: चुनौतियां

एक देश-एक चुनाव का मतलब है कि देश में सभी चुनाव एक साथ होंगे. लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग नहीं होंगे. यह व्यवस्था लागू करने में कई चुनौतियां हैं:

1. कार्यकाल:

लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग हो सकता है. लोकसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन इसे पांच साल से पहले भी भंग किया जा सकता है. विधानसभा का कार्यकाल भी पांच साल का होता है, लेकिन इसे भी पांच साल से पहले भंग किया जा सकता है. अगर एक देश-एक चुनाव लागू होता है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल एक साथ खत्म हो.

2. राजनीतिक सहमति:

एक देश-एक चुनाव लागू करने के लिए देश के सभी राजनीतिक दलों को सहमत होना होगा. अभी तक, सभी दलों की इस पर सहमति नहीं है. कुछ दल इसका समर्थन करते हैं, तो कुछ इसका विरोध करते हैं.

3. क्षेत्रीय दलों का नुकसान:

यह माना जाता है कि एक देश-एक चुनाव से राष्ट्रीय दलों को फायदा होगा, लेकिन क्षेत्रीय दलों को इसका नुकसान होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि राष्ट्रीय दलों के पास ज्यादा संसाधन और प्रचार करने की क्षमता होती है.

4. चुनाव प्रबंधन:

अभी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं. एक देश-एक चुनाव लागू होने पर सभी चुनाव एक साथ होंगे. इससे चुनाव प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाएगी. चुनाव आयोग को ज्यादा ईवीएम और वीवीपैट की व्यवस्था करनी होगी. साथ ही, चुनाव कराने के लिए ज्यादा अधिकारियों और सुरक्षाबलों की जरूरत होगी.

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First Published : 08 February 2024, 01:15 AM IST