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India Daily

Cyclone Murasu: भारत के किन इलाकों में चक्रवात सबसे ज्यादा तबाही मचाते हैं?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक चक्रवाती तूफान मुरसु ने मंगलवार तड़के आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में ओंगोल के पास तट को पार करना शुरू कर दिया.

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Edited By: Reepu Kumari
Cyclone Murasu: भारत के किन इलाकों में चक्रवात सबसे ज्यादा तबाही मचाते हैं?
Courtesy: Pinterest

Cyclone Murasu: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मंगलवार तड़के करीब एक बजे चक्रवाती तूफान मुरसु ने आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में ओंगोल के पास तट को पार करना शुरू कर दिया. बंगाल की खाड़ी के पश्चिम मध्य हिस्से में बना यह तूफान राज्य के दक्षिणी तट के बेहद करीब पहुंच चुका था.

जैसे ही तूफान ने जमीन को छुआ, उसकी आंख का अगला हिस्सा जमीन पर आ गया और केंद्र तट से टकराया. यह ओंगोल से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, कावली से 60 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और बापटला से 70 किलोमीटर दक्षिण में तट से टकराया.

पूर्वी तट पर सबसे बड़ा खतरा

ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु अक्सर चक्रवाती तूफानों की चपेट में आते हैं. आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल औसतन दो से चार ट्रॉपिकल साइक्लोन आते हैं. भारत को प्रभावित करने वाले करीब 80 फीसदी चक्रवात बंगाल की खाड़ी में ही बनते हैं और पूर्वी तट से टकराते हैं. इसी वजह से यह पूरा इलाका देश का मुख्य चक्रवात जोखिम क्षेत्र माना जाता है.

ओडिशा से आंध्र तक कहां कितना जोखिम

ओडिशा चक्रवात और आकाशीय बिजली, दोनों के लिहाज से संवेदनशील है. खराब मौसम में इसके तटीय जिलों को तेज हवाओं और भारी बारिश का सामना करना पड़ता है. आंध्र प्रदेश भी ऊंचे जोखिम वाला राज्य है, जहां नेल्लोर, नरसापुर और प्रकाशम सहित दक्षिणी तटीय इलाका संवेदनशील है. नवंबर 2026 की शुरुआत में मुरसु ने आंध्र और ओडिशा के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई, जिससे गंभीर बाढ़ और जलभराव के हालात बने.

बंगाल-तमिलनाडु और पश्चिमी तट की तस्वीर

पश्चिम बंगाल के सुंदरबन और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय जिले अक्सर चक्रवात के रेड अलर्ट जोन में आते हैं. दूसरी ओर, अरब सागर में बंगाल की खाड़ी के मुकाबले चक्रवात कम बनते हैं. ऐतिहासिक रूप से हर दो से चार चक्रवातों में से सिर्फ एक पश्चिमी तट की ओर बढ़ता है. गुजरात के कच्छ-सौराष्ट्र और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में जोखिम ज्यादा रहता है, जबकि गोवा, कर्नाटक और केरल में सीधी टक्कर की संभावना काफी कम है.

भीतरी इलाके भी सुरक्षित नहीं

चक्रवात का असर सिर्फ तट तक सीमित नहीं रहता. तट से टकराने के बाद हवा कमजोर पड़ने पर भी उसका बचा हुआ हिस्सा भीतरी इलाकों तक पहुंच सकता है. छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, जलभराव और आंधी-तूफान जैसे हालात बन सकते हैं. यानी खतरा तट से दूर बसे राज्यों के लिए भी बना रहता है.