नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के एक बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. अजमल ने दावा किया है कि चुनावों के बाद असम में 'मिया' समुदाय का प्रभाव बढ़ेगा, जबकि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का प्रभाव कम होगा.
गुवाहाटी में दिए गए एक बयान में अजमल ने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे और सत्ता के मौजूदा संतुलन में बदलाव देखने को मिलेगा. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी गतिविधियां अपने चरम पर हैं और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं.
असम में 'मिया' शब्द का इस्तेमाल बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए किया जाता है. इसे अक्सर अपमानजनक अर्थों में देखा जाता है. राज्य की कुल आबादी लगभग 3.12 करोड़ है, जिसमें मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 34 प्रतिशत है. इस आबादी में लगभग 4 प्रतिशत मूल असमिया मुसलमान और ज़्यादातर बंगाली बोलने वाले मुसलमान शामिल हैं.
इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पिछले पांच सालों में हमने बांग्लादेशी 'मियाओं' के हाथ-पैर तोड़ दिए हैं, और आने वाले पांच सालों में हम उनकी कमर तोड़ देंगे. इस बयान की भी विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की थी. अब अजमल की ताजा टिप्पणियों के बाद, राजनीतिक आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर और भी तेज हो गया है.
इस बीच असदुद्दीन ओवैसी भी असम चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. अजमल ने घोषणा की कि ओवैसी 2 और 3 अप्रैल को असम का दौरा करेंगे, जिसके दौरान वे विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम आठ जनसभाओं को संबोधित करेंगे.
ओवैसी पहले ही AIUDF को अपनी पार्टी का समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं. इस बार अजमल बिनाकांडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि पिछले लोकसभा चुनावों में उन्हें धुबरी सीट से करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी को इस बार विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.