कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से टीएमसी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं. पहले तो ममता बनर्जी को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा और अब आलम ये है कि ममता का साथ उनकी ही पार्टी के विधायक एक-एक कर छोड़ रहे हैं, जिससे बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में वो अकेली पड़ती नजर आ रही है.
टीएमसी में जारी अन्तर्कलह आज उस वक्त एक बार फिर से सामने आ गई, जब ममता बनर्जी कोलकाता में धरना प्रदर्शन के लिए पहुंची. ममता के इस प्रदर्शन के दौरान उनके साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ जरूर नजर आई, लेकिन सिर्फ 6 विधायक ही उनके साथ नजर आए.
बता दें कि बीते दिनों जब अभिषेक बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की हुई थी, तब भी उनके साथ पार्टी विधायक नजर नहीं आए थे, जिससे अब ये चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि चुनावी हार के बाद अब ममता का कुनबा भी धीरे-धीरे बिखरने लगा है.
गौरतलब है कि बीते शनिवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ उस समय धक्का-मुक्की की घटना सामने आई थी, जब वो दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हिंसा प्रभावित टीएमसी के पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने जा रहे थे. इस घटना को लेकर जहां टीएमसी ने बीजेपी को कठघरे में खड़ा किया, वही बीजेपी ने इसे टीएमसी कार्यकर्ताओं की ही नाराजगी का परिणाम बताया. सबसे खास बात यह रही कि इस घटना को लेकर ममता बनर्जी के अलावा कुछ ही सांसद व विधायक मुखर नजर आए, जबकि कई विधायकों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी.
दरअसल, ममता बनर्जी का ये धरना प्रदर्शन राज्य में रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में है. पूर्व सीएम ममता बनर्जी का आरोप है कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद से आम लोग और छोटे व्यापारी भय में जी रहे हैं. उनका कहना है कि रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी पुनर्वास योजना को अमल में लाये ही विस्थापित किया जा रहा है, जिससे हजारों लोगों पर रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है.
बहरहाल, ममता बनर्जी ने भले ही राज्य की बीजेपी के सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीएमसी में एकजुटता है? बीते कुछ दिनों में जिस तरह से विधायकों का अपनी ही पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बागी तेवर देखने को मिला है, उससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही टीएमसी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है.