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Hajipur Lok Sabha Result: चिराग की चिंगारी से चमका हाजीपुर, देखते रह गए राजद के तेजस्वी और लालू

Hajipur Lok Sabha Result: लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान ने हाजीपुर लोकसभा सीट से बड़ी जीत हासिल की है. चिराग ने राजद के उम्मीदवार शिव चंद्र राम को बड़े अंतर के साथ हराया है.

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Hajipur Lok Sabha Result
Courtesy: Social Media

Hajipur Lok Sabha Result: हाजीपुर लोकसभा सीट से चिराग पासवान ने बड़ी जीत हासिल कर ली है. हाजीपुर से चुनाव लड़कर वे तीसरी बार संसद पहुंचे हैं. चिराग मे राजद के उम्मीदवार शिव चंद्र राम को हराया है. हाजीपुर बिहार की सबसे हॉट सीटों में से एक है. चिराग पासवान को कुल 615718 वोट हासिल हुए. वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी शिव चंद्र राम को 445613 वोट ही ही हासिल हुए. तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार पासवान रहे.

क्या हैं स्थानीय मुद्दे?

पासवान परिवार की लगातार जीत के बावजूद इस सीट पर विकास के मुद्दे अहम हैं. ऐसा तब है जब पासवान परिवार हर समय केंद्र की सत्ता के साथ रहा है. गंगा नदी के पुल पर लगने वाला जाम हर चुनाव की तरह इस बार भी मुद्दा है. हालांकि, राम विलास पासवान ने ही यहां कई बड़े काम भी करवाए हैं जिनकी बदौलत चिराग पासवान अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं. इसके बावजूद, इसी लोकसभा क्षेत्र के कई गांव और क्षेत्र ऐसे हैं जो विकास से कोसों दूर हैं.

जातीय समीकरण

6 विधानसभा सीटों वाले हाजीपुर में लगभग 20 लाख वोटर हैं. इसमें से सबसे ज्यादा साढ़े तीन लाख वोटर यादव हैं. राजपूतों की संख्या भी लगभग इतनी ही है. यही वजह रही है कि जब-जब सवर्णों ने पासवान परिवार का साथ नहीं दिया, उनकी हार हुई है. इस सीट पर सहनी-मल्लाह वोटर भी अच्छी-खासी संख्या में हैं. यही वजह है कि इस चुनाव में तेजस्वी यादव अपने साथ-साथ मुकेश सहनी को लेकर घूमते नजर आए. इस सीट पर कुर्मी मतदाता भी ठीक-ठाक संख्या में हैं जो निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

2019 में कौन जीता था?

राम विलास पासवान के नाम से मशहूर इस सीट पर 2019 में पशुपति कुमार पारस LJP के टिकट पर चुनाव में उतरे. NDA के समर्थन और राम विलास पासवान के आशीर्वाद के चलते पशुपति पारस को 5.41 लाख वोट मिले और वह विजेता रहे. इस बार भी आरजेडी की ओर से चुनाव में उतरे शिव चंद्र राम को 2019 में 3.35 लाख वोट मिले थे और वह दूसरे नंबर पर रहे थे.

लोकसभा सीट का इतिहास

इस सीट के इतिहास की बात करें तो इसे मोटा-माटी राम विलास पासवान के नाम से ही जाना जाता है. अब तक कुल 16 चुनाव में से 8 बार खुद राम विलास पासवान ही यहां से सांसद रहे हैं, एक बार उनके भाई पशुपति पारस सांसद बने और इस बार राम विलास के बेटे चिराग पासवान मैदान में हैं. राम विलास पासवान के अलावा, राम सुंदर दास दो बार, राजेश्वर पटेल दो बार और वाल्मीकि चौधरी, दिग्विजय नारायण सिंह और राम रतन राम एक-एक बार सांसद बन चुके हैं.