नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक और अल-फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया. एजेंसी ने सिद्दीकी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत हिरासत में लिया है. यह कार्रवाई हाल ही में अल-फलाह समूह से जुड़े परिसरों पर की गई तलाशी और उससे मिले साक्ष्यों के आधार पर की गई.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की जांच दिल्ली पुलिस अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो FIR से शुरू हुई थी, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह विश्वविद्यालय ने छात्रों और हितधारकों को गुमराह करने के लिए फर्जी तौर पर NAAC और UGC की मान्यता प्राप्त होने का दावा किया था.
जांच में पाया गया कि विश्वविद्यालय ने यूजीसी अधिनियम की धारा 12(बी) के तहत मान्यता होने का झूठा दावा किया था, जबकि वास्तव में यह केवल धारा 2(एफ) के तहत शामिल था. यूजीसी ने भी स्पष्ट किया कि अल-फलाह विश्वविद्यालय ने कभी भी 12(बी) स्टेटस के लिए आवेदन नहीं किया था और वह किसी भी प्रकार के सरकारी अनुदान का पात्र नहीं है.
Directorate of Enforcement (ED), has arrested Jawad Ahmed Siddiqui, Chairman of Al Falah group, under Section 19 of the Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002. The arrest took place today following a detailed investigation and analysis of evidence gathered during search…
— ANI (@ANI) November 18, 2025
ईडी द्वारा की गई जांच में सामने आया कि 1995 में स्थापित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, जिसके संस्थापक और प्रबंध ट्रस्टी जवाद सिद्दीकी हैं, पूरे अल-फलाह समूह की संस्थाओं का संचालन और वित्तीय प्रबंधन करता है. ट्रस्ट और इससे जुड़े शैक्षणिक संस्थानों का पिछले वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ, लेकिन जांच अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि ट्रस्ट की वास्तविक आय और वित्तीय क्षमता से मेल नहीं खाती.
तलाशी के दौरान कई प्रमुख परिसरों से दस्तावेज, डिजिटल सबूत और करोड़ों रुपये की आपराधिक आय के प्रमाण मिले. एजेंसी का दावा है कि ट्रस्ट की धनराशि का लाभ सिद्दीकी के परिवार को पहुंचाया गया. निर्माण और खानपान के ठेके भी कथित तौर पर उनकी पत्नी और बच्चों से जुड़े व्यवसायों को दिए गए थे. ईडी ने कार्रवाई के दौरान 48 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए हैं. इसके अलावा समूह से संबंधित कई फर्जी कंपनियों की भी पहचान की गई है.
जांचकर्ताओं के अनुसार, जब्त किए गए दस्तावेज दिखाते हैं कि ट्रस्ट से निकाली गई धनराशि को विभिन्न खातों और फर्जी कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया, ताकि उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाई जा सके. यह पूरा वित्तीय नियंत्रण कथित तौर पर जवाद सिद्दीकी के इशारों पर होता था.
ईडी यह भी जांच कर रहा है कि क्या धन शोधन के जरिए जुटाए गए पैसे का कुछ हिस्सा 10 नवंबर को हुए लाल किला विस्फोट में शामिल व्यक्तियों तक पहुंचा था. इस हमले में 14 लोगों की मौत हुई थी. हालांकि इस पहलू की जांच अभी जारी है.
सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईडी ने 18 नवंबर 2025 को जवाद अहमद सिद्दीकी को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार किया. एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे संभव हैं.