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FCRA Bill पर सरकार का बड़ा कदम, JPC को भेजने पर विचार; PM मोदी से मिलने के बाद स्पीकर से मिले रिजिजू

एफसीआरए बिल को लेकर सरकार संयुक्त संसदीय समिति का रास्ता अपना सकती है. रिजिजू की स्पीकर से मुलाकात के बाद विपक्ष से सहमति बनाने की कोशिशों के बीच सियासत तेज है.

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Edited By: Reepu Kumari
FCRA Bill पर सरकार का बड़ा कदम, JPC को भेजने पर विचार; PM मोदी से मिलने के बाद स्पीकर से मिले रिजिजू
Courtesy: Pinterest

FCRA Bill 2026: एफसीआरए बिल को लेकर केंद्र सरकार संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के विकल्प पर विचार कर रही है. एफसीआरए बिल को संसद में आगे बढ़ाने से पहले इसकी विस्तृत जांच के लिए समिति के पास भेजे जाने की चर्चा है. प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की. इसके साथ ही वह विपक्षी दलों के नेताओं से भी बातचीत कर रहे हैं. सरकार की कोशिश विधेयक पर बने गतिरोध को कम करना है. एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं. विपक्ष का कहना है कि विदेशी योगदान से जुड़े नियमों में बदलाव करने वाले इस महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है. सरकार की ओर से जेपीसी का विकल्प अपनाए जाने की संभावना सामने आने के बाद अब संसद में विधेयक को लेकर आगे की रणनीति पर निगाहें टिक गई हैं.

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद रिजिजू सक्रिय

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की. इससे पहले वह अलग-अलग विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं. माना जा रहा है कि सरकार संसद में एफसीआरए विधेयक को लेकर किसी तरह का बड़ा गतिरोध नहीं चाहती. इसलिए सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है.

विपक्ष सिर्फ जेपीसी भेजने के पक्ष में नहीं

विपक्षी दलों की मांग सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है. कई दलों का कहना है कि केवल विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजना पर्याप्त नहीं होगा. विपक्ष के एक वर्ग की मांग है कि विधेयक को मौजूदा स्वरूप में वापस लिया जाए. इसके बाद सभी पक्षों से चर्चा करके नए सिरे से प्रावधानों पर विचार किया जाए.

सुप्रिया सुले ने भी उठाई मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने भी एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने या संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग की थी. उनका तर्क है कि विदेशी योगदान को लेकर बनाए जाने वाले नियमों पर व्यापक चर्चा जरूरी है. ऐसे कानून का असर सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों पर भी पड़ सकता है.

डीएमके ने अमित शाह से की मुलाकात

एफसीआरए विधेयक का विरोध करने वालों में डीएमके भी शामिल है. पार्टी के सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. डीएमके ने विधेयक वापस लेने की मांग रखी है. साथ ही मौजूदा कानून की धारा 15 को हटाने की मांग भी की गई है. वैकल्पिक तौर पर पार्टी ने कानून की व्यापक समीक्षा और विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की मांग की है.

कांग्रेस समेत कई दलों का विरोध

एफसीआरए विधेयक को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों समेत कई विपक्षी पार्टियां आपत्ति जता चुकी हैं. ऐसे में सरकार के सामने संसद में सहमति बनाने की चुनौती है. सोमवार को हुई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में एफसीआरए विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का उल्लेख नहीं हुआ. इससे संसद के मौजूदा सत्र में दोनों विधेयकों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.

अब आगे क्या करेगी सरकार?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का फैसला करती है या इसे मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाती है. विपक्ष की मांग और सरकार की रणनीति के बीच आने वाले दिनों में संसद में इस विधेयक को लेकर सियासी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं.