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'पुलिसवालों का भी परिवार होता है....', CJP प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा का दर्द सुनाने आए चार लोग कौन?

दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा. उन्होंने दावा किया कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थर, बोतल, गमले और चप्पलों से हमला किया गया.

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Edited By: Reepu Kumari
'पुलिसवालों का भी परिवार होता है....', CJP प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा का दर्द सुनाने आए चार लोग कौन?
Courtesy: ANI

नई दिल्ली: सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब एक नया पक्ष सामने आया है. प्रदर्शन में घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिवार पहली बार मीडिया के सामने आए और उन्होंने उस दिन की घटनाओं को लेकर अपनी पीड़ा साझा की. उनका कहना है कि ड्यूटी निभा रहे पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तस्वीर सामने आनी चाहिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल पुलिस अधिकारियों की पत्नी और बच्चों ने बताया कि उनके परिजन प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए थे. परिवारों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी छात्र आंदोलन को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि पुलिसकर्मियों के साथ हुई हिंसा और उनके परिवारों के दर्द पर भी समान रूप से चर्चा हो तथा दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए.

'खून से सनी वर्दी' का दर्द सुनाया

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने बताया कि उनके पति ड्यूटी के दौरान घायल हुए और जब घर लौटे तो उनकी हालत बेहद गंभीर थी. उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर, बोतल, चप्पल और अन्य सामान फेंके. उन्होंने कहा कि हर वर्दी के पीछे एक पूरा परिवार होता है, जिसका दर्द भी समझा जाना चाहिए.

परिजनों ने सोशल मीडिया की भूमिका पर उठाए सवाल

घायल सब-इंस्पेक्टर की बेटी और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा कुंजल ने कहा कि उनके पिता पहले भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो रह चुके हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके पिता पर हमला हुआ और बाद में सोशल मीडिया पर उन्हें ही गलत तरीके से पेश किया गया. परिवार का कहना है कि किसी भी घटना को केवल एक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.

हमले में भारी नुकसान का भी दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिवारों ने दावा किया कि हिंसा में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए. उनके अनुसार 110 से ज्यादा बैरिकेड, 300 बॉडी प्रोटेक्टर, 350 हेलमेट, 20 लाउडहेलर, 10 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर, एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर और 25 से अधिक सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

'पुलिसकर्मियों की पीड़ा भी संसद में उठे'

घायल एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि उनके पति को प्रदर्शन के दौरान चोटें आईं और उनका सुरक्षा हेलमेट भी पूरी तरह टूट गया. उनका कहना था कि यदि हेलमेट न होता तो बड़ा हादसा हो सकता था. उन्होंने सांसदों से अपील की कि संसद में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की परेशानियों पर भी चर्चा होनी चाहिए.

दोनों पक्षों की बात सुनने की मांग

घायल एसीपी के बेटे लक्ष्य सिंह ने कहा कि जब उन्होंने अपने पिता को सिर पर टांके लगे हुए देखा तो पूरा परिवार सदमे में आ गया. उन्होंने बताया कि उनके पिता के अनुसार भीड़ में कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे, जिन्होंने हालात बिगाड़े. परिवारों ने कहा कि उनका मकसद किसी छात्र आंदोलन का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पूरे घटनाक्रम को दोनों पक्षों के नजरिए से देखा जाए और निष्पक्ष न्याय मिले.