मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बर्खास्तगी की मांग को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं. चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में उग्र प्रदर्शन देखने को मिले.
पंजाब, हरियाणा और बिहार में स्थिति तनावपूर्ण हो गई. चंडीगढ़ और पटना में पुलिस ने चुनाव आयोग के विरोध में मार्च निकाल रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने और तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया.
असम की राजधानी गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राज्य कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई और कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस नेताओं ने जोरदार नारेबाजी की.
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय और जंतर-मंतर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स तैनात किए गए.
यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद गहराया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों पर 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं. राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए, हालांकि चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है.