दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गुरुवार, 24 सितंबर को रिहा कर दिया गया. इन सभी को अदालत से डिफॉल्ट जमानत मिल चुकी थी.
जमानत की शर्तों और जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उन्हें अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी गई है. आदेश के बाद वैनडाइक को गुरुवार रात तिहाड़ जेल से बाहर निकलते देखा गया.
NIA इस मामले में कुल सात विदेशी नागरिकों की भूमिका की जांच कर रही है. एजेंसी के मुताबिक, जांच का संबंध म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े कथित ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम से है. जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचे और एक तय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए. इस कार्यक्रम में ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली, युद्धक इस्तेमाल और जैमिंग तकनीक जैसी गतिविधियों से जुड़ा प्रशिक्षण दिए जाने का आरोप है. ये समूह म्यांमार के सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं.
यूक्रेनी नागरिक पेट्रो हर्बा, तारास स्लीवियाक और इवान सुकमानोव्स्की को 13 मार्च को लखनऊ हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था. उसी दिन मारियन स्टेफनकिव, मक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिन्स्की को दिल्ली हवाई अड्डे से पकड़ा गया था. NIA ने शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ UAPA और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने अदालत से अनुमति लेकर UAPA से जुड़े आरोपों की जांच के लिए 180 दिन तक का समय भी लिया था.
पहली चार्जशीट में NIA ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के प्रावधान लगाए. एजेंसी ने साथ ही स्पष्ट किया कि UAPA से जुड़ी जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है. छह यूक्रेनी नागरिकों को व्यक्तिगत बॉन्ड और एक-एक लाख रुपये की नकद जमा राशि पर जमानत मिली. FRRO द्वारा लगाए गए 5.5 लाख रुपये के जुर्माने के बाद उनके खिलाफ विदेशी कानून से जुड़े कुछ अपराधों का निपटारा भी किया गया. मैथ्यू वैनडाइक को 18 सितंबर को एक लाख रुपये के बॉन्ड और इतनी ही जमानत राशि पर राहत मिली थी. इसके बाद उन्होंने अमेरिका जाने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया. 23 सितंबर को NIA अदालत ने उनकी जमानत की शर्तों में बदलाव करते हुए विदेश जाने की अनुमति का रास्ता साफ किया.