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India Daily

'करीब 100 भाजपा सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज', CJP के सौरव दास ने प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली महिला का किया बचाव

नोएडा की रुचिका सिंह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दर्ज केस को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कार्रवाई का विरोध किया है. उन्होंने इसे आपराधिक कानून के दुरुपयोग का मामला बताया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'करीब 100 भाजपा सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज', CJP के सौरव दास ने प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली महिला का किया बचाव
Courtesy: @HCP_2026 X Account

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है. नोएडा निवासी रुचिका सिंह के समर्थन में CJP के प्रवक्ता सौरव दास सामने आए हैं. उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया.

रुचिका सिंह के समर्थन में CJP की प्रतिक्रिया

नोएडा की रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. इस कार्रवाई के बाद CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपशब्द कहने मात्र से उस पर आपराधिक मामला दर्ज करना उचित नहीं माना जा सकता. दास ने इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और ऐसे मामलों में कानून का संतुलित इस्तेमाल जरूरी है.

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद

सौरव दास ने अपने पोस्ट में दावा किया कि लोकसभा के कई सांसदों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और भाजपा के करीब 100 सांसद ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और एक 25 वर्षीय युवती के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय गंभीर मामलों पर ध्यान देना चाहिए. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई. कई लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने पुलिस की कार्रवाई को उचित बताया.

एफआईआर और पुलिस की जांच

पुलिस के अनुसार, हाल ही में हुए CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने की शिकायत मिली थी. इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राज्यों में अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी कई मामले दर्ज किए गए हैं.

विरोध प्रदर्शन और आगे की स्थिति

CJP लगातार मांग कर रही है कि आंदोलन में शामिल छात्रों और अन्य प्रतिभागियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लिए जाएं. पार्टी का कहना है कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और इससे जुड़े मामलों में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि सभी मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और अंतिम कार्रवाई साक्ष्यों तथा कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होगी. फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.