नई दिल्ली में BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और वैश्विक व्यापार में रुकावटों का सामना कर रही है. BRICS देशों के नेता शनिवार को दिल्ली में बैठक कर रहे हैं. इस बीच अमेरिका में भी इस सम्मेलन को लेकर नजर बनी हुई है. दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने BRICS के सामने आने वाली चुनौतियों और संगठन के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही हैं.
कुगेलमैन के मुताबिक इस बार BRICS समिट भारत के लिए अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर है. भारत इस मंच के जरिए ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर सकता है. हालांकि, उनके मुताबिक BRICS के बढ़ते आकार के साथ संगठन में आम सहमति बनाना पहले की तुलना में मुश्किल होता जा रहा है.
माइकल कुगेलमैन का मानना है कि भारत के लिए समिट की सफलता का एक बड़ा पैमाना साझा बयान जारी करवाना होगा. इसके लिए BRICS के सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनानी होगी. संगठन में सदस्यों और साझेदार देशों की संख्या बढ़ने के कारण अलग-अलग देशों के हितों को एक साथ लाना नई दिल्ली के लिए आसान नहीं होगा.
कुगेलमैन ने चेतावनी दी कि अगर BRICS में सदस्य देशों की संख्या लगातार बढ़ती रही और उनके बीच मतभेद भी बढ़े, तो भविष्य में संगठन के लिए प्रभावी तरीके से काम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. उनके अनुसार आम सहमति तक पहुंचना आने वाले समय में इस समूह के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
भारत के सामने समिट के दौरान दो बड़ी चुनौतियां बताई गई हैं. पहली चुनौती ईरान से जुड़ी है. BRICS में ईरान और UAE दोनों शामिल हैं और क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख बनाना आसान नहीं होगा. दूसरी बड़ी चुनौती अमेरिका से जुड़ी है. कुगेलमैन के मुताबिक रूस और ईरान जैसे कुछ सदस्य देश अमेरिका की आलोचना वाला साझा बयान जारी करने की कोशिश कर सकते हैं. चीन भी इस तरह के रुख का समर्थन कर सकता है. वहीं भारत और BRICS के कुछ अन्य देश अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना चाहेंगे.
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहा है. ऐसे में नई दिल्ली के लिए BRICS में सामूहिक रुख और अमेरिका के साथ अपने संबंधों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कुगेलमैन के अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां BRICS के लिए महत्वपूर्ण समय हैं. दुनिया की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था में अस्थिरता के बीच विकासशील देश वैश्विक व्यवस्था के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. ऐसे माहौल में BRICS ग्लोबल साउथ के देशों के लिए अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर सकता है.