BRICS Summit 2026: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स समिट 2026 के लिए भारत पहुंचे हैं. वे 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इससे एक दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस द्विपक्षीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत बनाना था.
रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों नेताओं ने साल 2030 तक भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर चर्चा की. फिलहाल दोनों देशों के बीच सालाना कारोबार करीब 60 अरब डॉलर का है. भारत अब सिर्फ तेल आयात तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह रूस के साथ औद्योगिक सहयोग, परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा क्षेत्र और खाद की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसका बड़ा कारण चीन और अमेरिका पर निर्भरता कम करना है.
पुतिन के शासन काल में रूस की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. तेल की ताकत को उन्होंने अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाया. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिए थे. इसके जवाब में रूस ने अपनी आर्थिक दिशा पूरी तरह ग्लोबल साउथ और एशिया की तरफ मोड़ दी. युद्ध से पहले भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 2-3 प्रतिशत थी. लेकिन जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा लगभग 51 प्रतिशत तक पहुंच गया. यानी रोज करीब 24.7 लाख बैरल रूसी तेल भारत आ रहा है. यह रिकॉर्ड स्तर है.
ब्रिक्स समिट के दौरान दोनों देश सिर्फ तेल व्यापार तक नहीं रुकेंगे. वे निवेश, रक्षा सहयोग और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी रिश्ते मजबूत करने की कोशिश करेंगे. रूस आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है. पुतिन ने युद्ध के दौरान भी कारोबार जारी रखने का तरीका निकाला. उन्होंने पश्चिमी दबाव को अवसर में बदल दिया और नए बाजार खोजे.
भारत के लिए यह सहयोग ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बहुत जरूरी है. सस्ता रूसी तेल मिलने से देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है. साथ ही रक्षा और अन्य क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने से दोनों देशों को लाभ होगा. ब्रिक्स जैसे मंच पर ये चर्चाएं बहुपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा देंगी.