नई दिल्ली: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को 18वें BRICS Leaders' Summit में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं. करीब सात साल बाद यह उनका भारत दौरा है. उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब 2020 के पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद भारत और चीन के रिश्तों को सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं. शी जिनपिंग BRICS Summit से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे.
शी जिनपिंग इससे पहले अक्टूबर 2019 में भारत आए थे. उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चेन्नई के पास मामल्लापुरम में अनौपचारिक बैठक की थी. इससे पहले 2016 में वे गोवा में आयोजित BRICS Summit में शामिल होने भारत आए थे. सितंबर 2014 में चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद उनका पहला भारत दौरा हुआ था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की थी.
शी जिनपिंग के साथ चीन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी भारत पहुंचे हैं. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल में कै क्यूई भी शामिल हैं, जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य और CPC Central Committee के General Office के निदेशक हैं. चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शी के साथ भारत आए हैं. भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों पर हालिया कूटनीतिक बातचीत में वांग यी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के मुताबिक, शी जिनपिंग BRICS Summit में भाषण देंगे और दूसरे देशों के नेताओं के साथ अंतरराष्ट्रीय तथा BRICS से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे. बैठक में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति, BRICS तंत्र के विकास और सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने पर बातचीत होगी.
चीन की ओर से BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पहल और प्रस्ताव भी रखे जाने की उम्मीद है. चीन ने BRICS देशों के साथ सहयोग को लगातार आगे बढ़ाने और साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की दिशा में काम करने की बात कही है.
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते 2020 के पूर्वी लद्दाख सैन्य गतिरोध के बाद लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं. सीमा पर शांति और स्थिरता कायम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रही है.