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India Daily

BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग के साथ भारत आया चीन का वो नेता, जिसे कहा जाता है राष्ट्रपति का ‘राइट हैंड’

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनका 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुंचा है. इस टीम में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के अलावा काई की भी शामिल हैं, जिन्हें शी जिनपिंग का बेहद करीबी और ‘राइट हैंड’ माना जाता है.

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Edited By: Reepu Kumari
BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग के साथ भारत आया चीन का वो नेता, जिसे कहा जाता है राष्ट्रपति का ‘राइट हैंड’
Courtesy: Pinterest

BRICS Summit 2026:  चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे हैं. उनके साथ चीन का 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है. इसमें विदेश मंत्री वांग यी के अलावा काई की भी शामिल हैं. 70 वर्षीय काई की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं में गिने जाते हैं. पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सात सदस्यों में वह पांचवें स्थान पर हैं.

शी तक सीधी पहुंच रखने वाले काई की

काई की कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटेरिएट के पहले सदस्य हैं. वह सीपीसी सेंट्रल कमेटी के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं. यह कार्यालय पार्टी के शीर्ष नेताओं के कार्यक्रम, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अंदरूनी संचार से जुड़े काम संभालता है. इसी जिम्मेदारी के कारण काई की की शी जिनपिंग तक सीधी पहुंच रहती है. उनकी भूमिका और प्रभाव को देखते हुए उन्हें अक्सर चीनी राष्ट्रपति का ‘राइट हैंड’ कहा जाता है.

सिर्फ करीबी नहीं, शी के चीफ ऑफ स्टाफ जैसे

रॉयटर्स ने काई की को शी जिनपिंग का डी-फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ बताया है. वह कई विदेश यात्राओं और बड़े राजनयिक कार्यक्रमों में शी के साथ नजर आते रहे हैं. दोनों नेताओं का राजनीतिक संपर्क भी काफी पुराना है. फुजियान और झेजियांग में दोनों के करियर का कुछ हिस्सा साथ रहा है. हालांकि, काई की का प्रभाव केवल व्यक्तिगत नजदीकी से नहीं, बल्कि पार्टी में उनके महत्वपूर्ण पदों से भी जुड़ा है.

तीन दशक पुराना है दोनों नेताओं का साथ

1996 में जब शी जिनपिंग फुजियान में पार्टी के डिप्टी सेक्रेटरी बने थे, तब काई की को उनके साथ काम करने के लिए नियुक्त किया गया था. इसके बाद काई की ने बीजिंग के मेयर समेत कई अहम पद संभाले. 2017 में शी के निर्देश पर उन्होंने बीजिंग में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया. 2022 में वह सीपीसी सेक्रेटेरिएट के फर्स्ट सेक्रेटरी और 2023 में जनरल ऑफिस के निदेशक बने.

एक साथ कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रहे

जून 2026 में काई की को सीपीसी सेंट्रल पार्टी स्कूल और नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस का प्रमुख भी बनाया गया. इससे पार्टी और सरकार के भीतर उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गईं. हालांकि, आधिकारिक प्रोटोकॉल में उन्हें चीन का नंबर दो नेता नहीं कहा जाता. यह स्थान प्रधानमंत्री ली च्यांग के पास है. काई की की वास्तविक ताकत शी जिनपिंग के साथ उनकी नजदीकी और एक साथ संभाली जा रही कई अहम जिम्मेदारियों से आती है.

भारत दौरे में काई की की भूमिका क्यों अहम?

2020 के सीमा विवाद के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव रहा है. हाल के समय में दोनों देश संबंधों में सुधार और तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमा, व्यापार और निवेश जैसे मुद्दों पर मतभेद कायम हैं. ऐसे माहौल में शी जिनपिंग के साथ काई की का भारत आना अहम है. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित बैठक के बीच काई की की मौजूदगी पर भी नजर रहेगी.