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India Daily

एक इंजन, दो ईंधन... देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को आज मिलेगी हरी झंडी, जानें इसकी खासियत

देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को आज साबरमती रेलवे स्टेशन से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हरी झंडी दिखाएंगे. 1400 हॉर्स पावर क्षमता वाले दो DPC को LNG तकनीक में बदला गया है और 2,000 किलोमीटर से ज्यादा का ट्रायल पूरा हो चुका है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
एक इंजन, दो ईंधन... देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को आज मिलेगी हरी झंडी, जानें इसकी खासियत
Courtesy: ChatGPT

देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को आज रविवार को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाई जाएगी. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इस ट्रेन को रवाना करेंगे. इसके साथ ही वे साबरमती रेलवे स्टेशन के विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे और रेलवे लोको इंजन के रखरखाव के लिए बनाए गए WAG-12 मेंटेनेंस शेड का भी उद्घाटन करेंगे.

इस ट्रेन की खासियत यह है कि इसके ड्राइविंग पावर कार यानी DPC में पहली बार LNG आधारित ड्यूल-फ्यूल प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है. इस तकनीक में एक ही इंजन LNG और डीजल दोनों ईंधनों पर चल सकता है. इससे जरूरत के हिसाब से दोनों ईंधनों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी.

रेलवे ने क्या कहा?

रेलवे के मुताबिक इस परियोजना के तहत 1400 हॉर्स पावर क्षमता वाले दो DPC को LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली में बदला गया है. इन दोनों DPC पर 2,000 किलोमीटर से ज्यादा का फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है. इस दौरान तकनीक की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता का परीक्षण किया गया.

इस तकनीक को अपनाने का उद्देश्य रेलवे की डीजल पर निर्भरता कम करना और परिचालन लागत को घटाना है. रेलवे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल पर भी जोर दे रहा है. रेलवे के अनुसार, LNG के इस्तेमाल से डीजल की खपत के साथ CO2, NOx और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है.

सालाना ईंधन लागत बचत 

ट्रायल के दौरान मिले आंकड़ों के आधार पर रेलवे ने करीब 23.9 लाख रुपये सालाना ईंधन लागत बचत का अनुमान लगाया है. हालांकि वास्तविक बचत LNG और डीजल की कीमत, ट्रेन के परिचालन और LNG के इस्तेमाल के अनुपात पर निर्भर करेगी.

इंजन में 2,200 लीटर क्षमता का LNG टैंक लगाया गया है. इसमें करीब 950 से 1,000 किलोग्राम उपयोगी LNG भरी जा सकती है. एक बार टैंक भरने के बाद ट्रेन करीब 444 किलोमीटर तक चल सकेगी. ड्यूल-फ्यूल तकनीक के कारण इंजन जरूरत के अनुसार LNG और डीजल दोनों का इस्तेमाल कर सकेगा.