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क्या है हंटावायरस? जिसमें 100 में से 38 मरीजों की हो जाती है मौत! WHO ने क्रूज पर 3 मौतों की दी जानकारी

who ने एक बयान जारी कर एक हंटावायरस फैलने की जानकारी दी है. इस बीमारी ने क्रूज पर 3 लोगों की जान ले ली है जबकि एक यात्री साउथ अफ्रीका में आईसीयू में भर्ती है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
क्या है हंटावायरस? जिसमें 100 में से 38 मरीजों की हो जाती है मौत! WHO ने क्रूज पर 3 मौतों की दी जानकारी
Courtesy: GROK

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि who ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक जानकारी दी है. डब्ल्यूएचओ ने बयान जारी कर बताया है कि अटलांटिक महासागर के बीच में एक क्रूज पर संभावित हंटावायरस से तीन लोगों की मौत हो गई है. साथ ही ये भी बताया है कि कम से कम एक यात्री गंभीर रूप से बीमार है और साउथ अफ्रीका के एक अस्ताल में आईसीयू में है. इसके साथ ही इस क्रिटिकल बीमारी के एक केस की पुष्टी भी की है. एमवी होंडियस (MV Hondius) यात्रा कर रहे अन्य पांच यात्रियों की भी अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है.

क्या है हंटावायरस?

जानकारी के मुताबिक हंटावायरस एक क्रिटिकल और गंभीर बीमारी है. इसमें गंभीर रूप से बुखार, खून का बहना और मौत भी हो सकती है. यह वायरस चूहों और गिलहरियों से फैलता है. इसके फैलने के ज्यादातर चांस जानवरों के मल-मूत्र के संपर्क में आने होते हैं. हालांकि आमतौर पर यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता लेकिन क्रिटिकल सिचुएशन में यह लोगों के बीच फैल भी सकता है. दुनिया भर में हर साल हंटावायरस के लगभग डेढ़ से दो लाख मामले सामने आते हैं. हालांकि यह वायरस कोविड औऱ इन्फ्लूएंजा जैसे हवा में फैलने वाले वायरस की तुलना में कम संक्रामक है. क्योंकि आमतौर पर यह लोगों में एक दूसरे से स्प्रैड नहीं होता है.

हंटावायरस क्यों है जानलेवा?

हंटावायरस एक खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस वायरस के मुख्य रूप से दो प्रकार हैं और दोनों ही वेरियंट्स के लक्षण भी अलग-अलग हैं.

हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम- यह वायरस फेफड़ों को इफेक्ट करता है. हालांकि यह पूरी दुनिया में नहीं बल्कि अमेरिका में पाया जाता है. इस वायरस से यदि कोई संक्रमित होता है तो कुछ ही दिनों में उसे खांसी और सांस लेने में परेशानी होने लगती है. बीमारी बढ़ने पर मरीज को थकान, मांसपेशियों में दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. मरीज को सिरदर्द, चक्कर आना उल्टी, जी मिचलाना और पेट दर्द की शिकायत भी सो सकती है. हंटावायरस का सबसे जानलेवा यह वेरियंट सबसे ज्यादा जानलेवा है. इस वायरस से संक्रमित 38 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है.

हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम- यह वेरियंट मुख्य रूप से यूरोप और एशिया में पाया जाता है. लेकिन इसका एक और प्रकार पूरी दुनिया में फैल चुका है, जिसे 'सियोल वायरस' के नाम से जाना जाता है. हंटावायरस का यह वेरियंट सीधे किडनी पर अटैक करता है. ज्यादातर इस वायरस के संपर्क में आने के दो हफ्तों के भीतर ही मरीज में इसके लक्षण दिखने लगते हैं. शुरूआत में बहुत तेज सिरदर्द, पेट दर्द, जी मिचलाना और धुंधला दिखाई देने लगता है. जब बीमारी और ज्यादा फैलती है तब लो ब्लड प्रेसर और किडनी पूरी तरह फेल भी हो सकती है. यह बीमारी 1 से 15 प्रतिशत लोगों मरीजों की मौत का कारण बन सकती है.

क्या है इसका इलाज?

बुरी खबर यह हंटावायरस के किसी भी वेरियंट के लिए कोई खास इलाय या दवा मौजूद नहीं है. हालांकि शुरूआती ट्रीटमेंट से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है. इसमें रेस्पिरेटर, ऑक्सीजन थेरेपी और डायलिसिस का उपयोग किया जाता है.