गुजरात में चांदीपुरा वायरस के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. यह एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस वायरस से संक्रमित बच्चों की हालत 24 से 48 घंटे के भीतर तेजी से गंभीर हो सकती है.
इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस वायरस का खतरा सबसे अधिक होता है. इसका प्रमुख कारण यह है कि इस उम्र में बच्चों का ब्लड ब्रेन बैरियर पूरी तरह विकसित नहीं होता.
यह प्राकृतिक सुरक्षा परत सामान्य स्थिति में हानिकारक तत्वों को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकती है. लेकिन छोटे बच्चों में इसके पूरी तरह विकसित न होने के कारण वायरस आसानी से मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और सूजन पैदा कर सकता है. इससे दिमाग के सामान्य कार्य प्रभावित हो सकते हैं.
बच्चों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी संक्रमण का खतरा बढ़ाती हैं. चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई के काटने से फैलता है. यह कीट जमीन के पास अधिक सक्रिय रहता है. छोटे बच्चे अक्सर जमीन पर खेलते, बैठते या सोते हैं और उनके हाथ पैर भी खुले रहते हैं. ऐसे में उन्हें सैंडफ्लाई के काटने का खतरा वयस्कों की तुलना में अधिक होता है. ग्रामीण और वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले बच्चों में यह जोखिम और बढ़ जाता है.
इस संक्रमण के शुरुआती लक्षण अचानक तेज बुखार, उल्टी और तेज सिरदर्द के रूप में सामने आ सकते हैं. यदि समय रहते इलाज न मिले तो बीमारी तेजी से एक्यूट एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क की गंभीर सूजन का रूप ले सकती है. इसके बाद बच्चे को दौरे पड़ना, बेहोशी, मानसिक भ्रम और चेतना में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है.
फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है. इसलिए उपचार मुख्य रूप से सपोर्टिव केयर पर आधारित होता है. अस्पताल में मरीज के शरीर में पानी की कमी को दूर रखने, दौरे नियंत्रित करने, सांस और अन्य जरूरी शारीरिक कार्यों की निगरानी करने तथा न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर लगातार नजर रखने का प्रयास किया जाता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव ही इस बीमारी से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है. बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं, मच्छरदानी और कीट भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें तथा घर और आसपास साफ सफाई बनाए रखें. यदि बच्चा ऐसे क्षेत्र में रहता है जहां चांदीपुरा वायरस के मामले सामने आए हैं और उसे तेज बुखार के साथ दौरे, बेहोशी या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं.