नई दिल्ली: हर साल 8 सितंबर को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य शिक्षा और साक्षरता के महत्व को सामने लाना है. इसी मौके पर भारत के सबसे अधिक शिक्षित लोगों में गिने जाने वाले डॉ. श्रीकांत जिचकर की कहानी भी चर्चा में आती है. महाराष्ट्र में जन्मे जिचकर ने अलग अलग विषयों में पढ़ाई की और शिक्षा को केवल नौकरी हासिल करने का जरिया नहीं माना. उनके लिए ज्ञान हासिल करना जीवन को बेहतर बनाने का रास्ता था.
यूनेस्को ने 17 नवंबर 1965 को 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की थी. इसके अगले साल यानी 1966 से यह दिवस मनाया जाने लगा. साल 2026 की थीम ‘लिट्रेसी फॉर पीपुल, द प्लैनेट एंड प्रासपैरिटी’ है. भारत की साक्षरता दर अब 80.9 फीसदी बताई गई है, जबकि 2011 में यह 74 फीसदी थी. 1961 में यह 28.30 फीसदी और 1971 में 34.45 फीसदी थी.
डॉ. श्रीकांत जिचकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था. बचपन से ही उन्हें पढ़ाई में गहरी दिलचस्पी थी. उन्होंने चिकित्सा विज्ञान के साथ कानून, प्रशासन, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र और दर्शन जैसे विषयों का अध्ययन किया. पत्रकारिता और साहित्य में भी उनकी रुचि थी. संस्कृत और अन्य भाषाओं में भी उन्होंने रुचि दिखाई. दावा किया जाता है कि उनके पास 20 डिग्रियां थीं और उन्होंने विश्वविद्यालय तथा प्रतियोगी परीक्षाओं समेत 42 परीक्षाएं दी थीं.
जिचकर ने अलग अलग क्षेत्रों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हिस्सा लिया और सफलता हासिल की. उन्होंने प्रशासनिक सेवा से जुड़ी परीक्षा के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा भी पास की थी. चिकित्सा और कानून से संबंधित परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता पाई. अलग अलग विषयों की तैयारी के बावजूद उन्होंने अपनी क्षमता साबित की. उनके बारे में 28 गोल्ड मेडल हासिल करने का भी दावा किया जाता है. यही उपलब्धियां उन्हें देश के सबसे अधिक शिक्षित लोगों में खास बनाती हैं.
शिक्षा के साथ डॉ. जिचकर ने सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने और बाद में राज्यसभा के सदस्य भी रहे. राजनीति में रहते हुए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन जैसे मुद्दों पर काम किया. उनका मानना था कि देश की तरक्की के लिए शिक्षित और जागरूक नागरिक जरूरी हैं. उनकी सोच केवल डिग्रियां हासिल करने तक सीमित नहीं थी. वे अपने ज्ञान को समाज और सार्वजनिक जीवन में उपयोगी बनाने की कोशिश करते रहे.
डॉ. श्रीकांत जिचकर को अक्सर भारत का सबसे पढ़ा लिखा व्यक्ति कहा जाता है, लेकिन इस उपाधि को आधिकारिक मानना मुश्किल है. देश में कई ऐसे विद्वान रहे हैं, जिन्होंने अलग अलग क्षेत्रों में उच्च शिक्षा हासिल की और महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसलिए जिचकर को भारत के सबसे अधिक शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा वाले लोगों में से एक कहना अधिक उचित होगा.