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India Daily

लॉ स्टूडेंट्स पर एक्शन नहीं ले सकता BCI, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लोगों ने बताया लोकतंत्र की जीत

कोर्ट ने साफ कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कोर्ट के अनुसार छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित शिक्षण संस्थान के पास है, न कि बीसीआई के पास.

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Edited By: Antima Pal
लॉ स्टूडेंट्स पर एक्शन नहीं ले सकता BCI, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लोगों ने बताया लोकतंत्र की जीत
Courtesy: Pinterest

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कोर्ट के अनुसार छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित शिक्षण संस्थान के पास है, न कि बीसीआई के पास.

यह फैसला हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े विवाद में आया. छात्रों ने विश्वविद्यालय के 2026 के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी पर आपत्ति जताई थी. इस विवाद के दौरान बीसीआई ने कुछ नोटिफिकेशन जारी किए थे.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे. कोर्ट ने बीसीआई द्वारा जारी दो नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया. ये नोटिफिकेशन आलोचना के बाद कुछ घंटों में ही वापस ले लिए गए थे. कोर्ट ने अपना पहले का आदेश भी स्थायी बना दिया, जिसमें बीसीआई और राज्य बार काउंसिलों को छात्रों या फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से रोका गया था.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ लॉ कोर्स में दाखिला लेने से छात्र बीसीआई के नियामक ढांचे के अंतर्गत नहीं आते. यानी बीसीआई कानून के छात्रों पर नियंत्रण नहीं रख सकता.

इस फैसले पर एक्स पर काफी प्रतिक्रियाएं आईं. कई यूजर्स ने इसे लोकतंत्र और छात्र अधिकारों की जीत बताया. एक यूजर ने लिखा कि बीसीआई ने सिर्फ एक पत्र लिखने के कारण पूरे बैच को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि छात्रों पर उसका कोई अधिकार नहीं है.

दूसरे यूजर ने कहा कि यह जवाबदेही की दिशा में अच्छा कदम है. कोई भी संस्था छात्रों के खिलाफ अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकती. कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत करार दिया. एक पोस्ट में लिखा गया कि नालसार छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी की जीत दरअसल छात्रों और लोकतंत्र दोनों की जीत है.