नई दिल्ली: आज की Gen Z ऐसी दुनिया में बड़ी हो रही है, जहां किसी भी सवाल का जवाब कुछ सेकंड में इंटरनेट पर मिल जाता है. पढ़ाई से लेकर करियर तक, गूगल और एआई कई काम आसान कर चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब जानकारी इतनी आसानी से उपलब्ध है, तो शिक्षक की जरूरत आखिर क्यों बनी हुई है? 5 सितंबर का शिक्षक दिवस इसी सवाल पर सोचने का मौका देता है.
भारत में शिक्षक दिवस पूर्व राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाता है. उनके छात्रों ने जब जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने इसे शिक्षकों के सम्मान के दिन के रूप में मनाने की बात कही थी. आज के डिजिटल दौर में इस दिन का मतलब सिर्फ शुभकामनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन की अहमियत समझना भी है.
स्क्रीन जानकारी दे सकती है, जिंदगी का रास्ता नहीं
गूगल किसी सवाल का जवाब खोज सकता है और एआई लिखने, समझने या सीखने में मदद कर सकता है. लेकिन असफलता, तनाव, करियर को लेकर उलझन या किसी कठिन परिस्थिति में इंसान को केवल जानकारी नहीं, समझ और सही दिशा की जरूरत होती है. यही भूमिका शिक्षक और मार्गदर्शक निभाते हैं. वे पढ़ाई के साथ सही-गलत पहचानने, परिस्थितियों को समझने और फैसले लेने का नजरिया भी विकसित करते हैं.
डॉ. राधाकृष्णन की सोच में शिक्षा का मतलब केवल डिग्री हासिल करना नहीं था. वे चरित्र निर्माण, स्वतंत्र सोच और लगातार सीखने को महत्व देते थे. उनकी सीख युवाओं को बताती है कि अच्छा शिक्षक वह है जो केवल उत्तर नहीं देता, बल्कि सवाल पूछना और खुद विचार करना सिखाता है. आज एआई के दौर में आलोचनात्मक सोच और अपनी समझ विकसित करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है.
इस बार शिक्षक दिवस पर सोशल मीडिया पर केवल एक पोस्ट या संदेश डालने के बजाय उस शिक्षक, वरिष्ठ या मार्गदर्शक को याद किया जा सकता है, जिसने कभी सही दिशा दिखाने में मदद की हो. कई बार किसी शिक्षक की कही छोटी-सी बात भी जिंदगी के बड़े फैसले पर असर डाल देती है. एआई और तकनीक के बीच यह मानवीय जुड़ाव ही शिक्षक की सबसे बड़ी ताकत है. जानकारी मशीन दे सकती है, लेकिन समझ विकसित करने में इंसान की भूमिका आज भी खास है.