नई दिल्ली: अब जमाना बदल गया है. अब गणित या विज्ञान के न्यूमेरिकल सवालों पर घंटों तक दिमाग खपाने की कोई जरूरत नहीं है. यहां तक कि होमवर्क को लेकर माता-पिता से होने वाली बहसें भी खत्म हो गई हैं. अब हम AI के युग में जी रहे हैं. आज के छात्रों के पास एक जबरदस्त टूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI मौजूद है.
हालांकि इस टूल के साथ-साथ कई तरह के डर और सवाल भी सामने आ रहे हैं. इस बात पर दुनिया भर में एक बहस चल रही है कि क्या यह हथियार छात्रों की असली बुद्धिमत्ता यानी उनकी जन्मजात संज्ञानात्मक क्षमताओं के लिए कोई खतरा पैदा कर रहा है. हाल ही में सामने आए वैश्विक डेटा और विशेषज्ञों की राय ने इसी विषय पर एक नई वैश्विक बहस को जन्म दिया है.
शिक्षा के क्षेत्र में AI निश्चित रूप से एक वरदान जैसा प्रतीत होता है. अब Wordly जैसे प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जहां विदेशी भाषाओं में दिए गए लेक्चर को उसी समय उपलब्ध कराया जाता है और उन्हें उस खास भाषा में अनुवादित कर दिया जाता है, जिसे छात्र समझता है.
दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय जैसे संस्थान इस तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं. हालांकि सिक्के का दूसरा पहलू काफी चिंताजनक है. गैलप और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि 57 छात्र अब हर हफ्ते AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं.
वैश्विक टेक-साइंस मीडिया प्लेटफॉर्म Digital Journal के एक विश्लेषण के अनुसार AI का अत्यधिक उपयोग छात्रों को संज्ञानात्मक ऑफलोडिंग की ओर धकेल रहा है. इसका मतलब यह है कि समस्याओं को खुद से हल करने के बजाय, छात्र अब जवाब पाने के लिए AI पर निर्भर हो गए हैं.
आलोचनात्मक सोच का अंत
जब छात्र होमवर्क असाइनमेंट पूरे करने और निबंध लिखने के लिए AI पर निर्भर हो जाते हैं, तो उनकी तार्किक तर्क-क्षमता और अपने स्वतंत्र विचार विकसित करने की क्षमता कमज़ोर पड़ने लगती है.
गलत जानकारी का भ्रम
AI में अक्सर भ्रम की समस्या होती है यानी ऐसे मौके जब यह गलत तथ्यों को पूरे आत्मविश्वास के साथ पेश करता है, जिन्हें छात्र सच मान लेते हैं.
करियर की संभावनाओं के लिए खतरे
भले ही छात्र AI की मदद से डिग्री हासिल कर लें, लेकिन अगर बाद में उन्हें बिना किसी बाहरी मदद के अपने काम करने पड़ें, तो वे कार्यस्थल पर पूरी तरह से असफल साबित हो सकते हैं.
सबसे बड़ी चिंता यह है कि आधे से ज्यादा छात्रों का कहना है कि उनके स्कूल और कॉलेजों में AI के उपयोग को लेकर कोई स्पष्ट नियम या गाइडलाइन नहीं है. इससे छात्र पढ़ाई को शॉर्टकट में बदल रहे हैं.
हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि AI को दुश्मन नहीं, बल्कि सहायक की तरह इस्तेमाल करना चाहिए. अगर बच्चों को सही दिशा और सही ट्रेनिंग दी जाए, तो AI उन्हें और ज्यादा ज्ञानवान बना सकता है.