तमिलनाडु के ईरोड के रहने वाले 17 वर्षीय प्रणव इलंगो ने छोटी उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का सपना देखा था. अब उनका यह सपना अमेरिका की प्रतिष्ठित Brown University तक पहुंच गया है. प्रणव को विश्वविद्यालय में दाखिला मिलने के साथ चार वर्षों के लिए करीब 3.55 करोड़ रुपये की फुल स्कॉलरशिप मिली है. यह राशि उनकी पढ़ाई और रहने के खर्च को कवर करेगी.
प्रणव Brown University में Public Health और Applied Mathematics की पढ़ाई करेंगे. इन दोनों विषयों के जरिए वह गणित, तकनीक और डेटा का इस्तेमाल सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी जटिल समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने में करना चाहते हैं. उनका लक्ष्य शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित रखने के बजाय समाज के लिए उपयोगी बनाना है.
प्रणव ईरोड स्थित CS Academy के छात्र रहे हैं. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने Dexterity Global के National Scholar Development Programme से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की तैयारी शुरू की. इस दौरान उन्हें पढ़ाई के साथ नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान और व्यापक सोच विकसित करने के लिए मार्गदर्शन मिला. लगातार मेहनत ने उनकी शैक्षणिक यात्रा को नई दिशा दी.
प्रणव की शैक्षणिक उपलब्धियों में Cambridge परीक्षाओं का प्रदर्शन भी खास रहा है. उन्हें Outstanding Cambridge Learners में शामिल किया गया और IGCSE Mathematics में World Topper का गौरव भी हासिल हुआ. हालांकि, उनके लिए गणित सिर्फ अच्छे अंक हासिल करने का विषय नहीं है. वह इसे वास्तविक दुनिया की समस्याओं को समझने और उनके समाधान का माध्यम मानते हैं.
प्रणव की रुचि सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग, उद्यमिता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस में भी है. भविष्य में वह ऐसा Public Health Venture शुरू करना चाहते हैं, जो सरकारों और समुदायों को विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य संबंधी फैसले बेहतर बनाने में मदद करे. खासकर उन क्षेत्रों पर उनका ध्यान है जहां संसाधनों और सही जानकारी की कमी है.
1764 में स्थापित Brown University अमेरिका की आठ Ivy League संस्थाओं में शामिल है. यहां पहुंचना प्रणव के लिए मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है. वह विश्वविद्यालय में हासिल ज्ञान को भारत की वास्तविक समस्याओं से जोड़ना चाहते हैं. ईरोड से शुरू हुई उनकी यह यात्रा दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और स्पष्ट उद्देश्य के साथ छोटे शहरों से निकले छात्र भी दुनिया के बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं.