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'अब लंदन तक जाएगी कोल्हापुरी, मसाला भी होगा ग्लोबल', भारत-यूके FTA डील पर पीयूष गोयल ने की पीएम मोदी की तारीफ

भारत-यूके एफटीए न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि भारतीय उत्पादों और पेशेवरों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगा. यह समझौता भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को साकार करने और आत्मनिर्भर भारत के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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Edited By: Mayank Tiwari
 Union Commerce Minister Piyush Goyal
Courtesy: Social Media

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार (26 जुलाई) को भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए गेम-चेंजर करार दिया. उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत और 'विकसित भारत' के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि यह समझौता भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की यात्रा को गति देगा. गोयल ने इस ऐतिहासिक समझौते का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता और स्वीकार्यता को दिया.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता 22-23 वर्षों की लंबी चर्चाओं के बाद संभव हुआ. उन्होंने जोर देकर कहा, "यह गेम-चेंजिंग मुक्त व्यापार समझौता देश के किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र, श्रमिकों, युवाओं और मछुआरों के लिए असीमित अवसर लाता है. अब तक के सभी मुक्त व्यापार समझौतों में यह सबसे बड़ा, सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक है." लगभग 30 अध्यायों में यह समझौता उन महत्वपूर्ण विषयों को संबोधित करता है, जिन पर भारत पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चल पाता था.

दो दशकों की मेहनत का परिणाम

पीयूष गोयल ने कहा, "इन मुद्दों पर भारत ने अपनी शर्तों पर और आत्मविश्वास के साथ यह समझौता किया है. मुझे विश्वास है कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इसके लाभ भविष्य में दिखाई देंगे.

"संतुलित और जीत-जीत वाला समझौता

मंत्री ने बताया कि यह समझौता एक विकसित देश, जो दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसके साथ हुआ है. इसके बावजूद, भारत ने अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं और "रक्षात्मक हितों" को संतुलित किया है. उन्होंने कहा, "डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला गया है; कृषि क्षेत्र की कोई संवेदनशील वस्तु को नहीं खोला गया है; इथेनॉल भी नहीं. यह एक जीत-जीत वाला एफटीए है, जो व्यापक, सरल और संतुलित सहयोग पर आधारित है, जो दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाता है." गोयल ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हुआ, क्योंकि भारत अब एक सक्षम विकासशील अर्थव्यवस्था है, जो किसी भी प्रतिस्पर्धा से नहीं डरता.

भारतीय मसालों और जीआई उत्पादों को बढ़ावा

गोयल ने बताया कि इस समझौते से भारतीय मसालों को यूके के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जिससे यूनाइटेड किंगडम में रहने वाली 50 लाख दक्षिण एशियाई मूल की आबादी को लाभ होगा. उन्होंने कहा, "मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यूके में 50 लाख से अधिक दक्षिण एशियाई लोग रहते हैं, जिनमें 18 लाख भारतीय मूल के हैं. इन सभी के स्वाद को अब लाभ मिलेगा. रोजमर्रा की खाद्य वस्तुएं अब भारत से निर्यात की जा सकेंगी, जिससे भारतीय किसानों की उपज को प्रसंस्करण के बाद बेहतर बाजार मिलेगा. यह हमारी प्राथमिकता रही है.

"कोल्हापुरी चप्पल और अन्य जीआई उत्पाद

मंत्री ने विशेष रूप से कोल्हापुरी चप्पल जैसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पादों को मिलने वाले लाभ पर जोर दिया. उन्होंने हाल ही में कोल्हापुरी चप्पल के डिज़ाइन के दुरुपयोग की घटना का जिक्र करते हुए कहा, "हाल ही में कोल्हापुरी चप्पल के डिज़ाइन का निर्यातित उत्पादों में उपयोग हुआ, जिस पर वाणिज्य मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई की. अब जब कोल्हापुरी चप्पल निर्यात होंगी, तो भारत को इसका श्रेय मिलेगा, इसे भारत के नाम पर जीआई उत्पाद के रूप में निर्यात किया जाएगा. कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारतीय डिज़ाइनों को वैश्विक बाजार में बेचने में रुचि दिखा रही हैं.

"गोयल ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि केवल कोल्हापुरी चप्पल ही 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बनाए रख सकती है. इसके डिज़ाइन इतने सुंदर हैं... मैंने अपना पूरा बचपन कोल्हापुरी चप्पल पहनकर बिताया है और मैं इनके आकर्षण को समझता हूं." उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों से इस समझौते के प्रावधानों का अध्ययन कर इसका लाभ उठाने की अपील की.

श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

इस समझौते से कपड़ा, जूते, चमड़ा, खिलौने, फर्नीचर और रत्न-आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष लाभ होगा. इसके अलावा, दवा उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र को भी "लोकल टू ग्लोबल" की दिशा में बढ़ावा मिलेगा. गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में स्थापित करने में मदद करेगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों को नई ऊंचाइयां छूने का मौका मिलेगा.

डबल कॉन्ट्रीब्यूशन कन्वेंशन समझौता

मंत्री ने डबल कॉन्ट्रीब्यूशन कन्वेंशन समझौते पर भी प्रकाश डाला, जो व्यापार करने की लागत को कम करेगा और विशेष रूप से यूके में कार्यरत भारतीय मूल के पेशेवरों को लाभ पहुंचाएगा. उन्होंने कहा, "ऐसे पेशेवरों की लगभग 25 प्रतिशत सैलरी यूके की सामाजिक सेवाओं में योगदान के रूप में कट जाती थी. यह राशि केवल 10 साल की नौकरी के बाद वापस मिलती थी. इससे एक से तीन साल के लिए वहां जाने वालों को नुकसान होता था. अब डबल कॉन्ट्रीब्यूशन कन्वेंशन समझौते के तहत, यूके में तीन साल तक सेवा देने वालों का योगदान भारत में उनके ईपीएफओ खातों में स्थानांतरित होगा." यह समझौता व्यापार, वित्त, बैंकिंग, आईटी, एआई और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेगा.

यूपीए की नीतियों पर उठाए सवाल

गोयल ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार द्वारा किए गए एफटीए को भारत के हितों के लिए हानिकारक बताया. उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार आसियान देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करती थी, जो हमारे साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले देश थे. वे भारत के बाजारों को ऐसे देशों के लिए खोलते थे, जो सस्ते उत्पाद बेचकर हमारे विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुंचाते थे.

आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

गोयल ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार के तहत हुए एफटीए उन देशों के साथ हैं, जिनके साथ भारत प्रतिस्पर्धा नहीं करता, बल्कि पूरक की भूमिका निभाता है. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के तहत हुए एफटीए और अन्य विकसित देशों के साथ चल रही चर्चाएं उन देशों के साथ हैं, जिनके साथ हम एक-दूसरे के पूरक हैं. यह विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम है. यह मेक इन इंडिया और 'लोकल टू ग्लोबल' के लिए मील का पत्थर साबित होगा."