आज का दिन बेहद खास है, क्योंकि आज से ठीक 75 साल पहले देश की सबसे पुरानी मंदिरों में से एक सोमानाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था. तब से अभी तक इस दिन को सोमनाथ अमृत पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस खास आयोजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 90 मीटर ऊंचे मंदिर शिखर का जला अभिषेक किया है.
आपको बता दें कि भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिनमें से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ बताया जाता है. आइए इस खास दिन पर इस मंदिर से जुडी कुछ खास बातों के बारे में जानते हैं.
देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग है, जहां देवों के देव महादेव की शिवलिंग स्थापित कई गई है. इन 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला स्थान सोमनाथ शिवलिंग को दिया गया है. गुजरात में बसे इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर को खुद सोम के नाथ यानी चंद्रमा के स्वामीने बसाया था.
इस बात का जिक्र शिवपुराण और स्कंद पुराण समेत कई हिंदू धर्मों के ग्रंथों में की गई है. कहा जाता है कि यहां केवल दर्शन करने सेही भक्तों के सभी पाप खत्म हो जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्रदेव का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से किया गया था. इन पुत्रियों को नक्षत्रों का प्रतीक कहा जाता है. इन सभी में से चंद्रमा सबसे ज्यादा प्रेम रोहिणी से करते थे, उनके साथ ज्यादा समय बिताते थे. जिसके कारण बाकी पत्नियां दुखी रहने लगी थी.
दुखी बेटियों ने चंद्रदेव की शिकायत अपने पिता से की. जिसके बाद दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को समझाने की कोशिश की. लेकिन चंद्रेदव उनकी बातों को समझे नहीं. फिर दक्ष ने गुस्सा होकर चंद्रमा को श्राप दे दिया कि उनका तेज खत्म हो जाएगा. जिसके बाद धीरे-धीरे यह सच भी होने लगा और चंद्रमा की चमक कम हो गई. जिसके बाद ब्रह्मदेव ने चंद्रमा को भगवान शिव की पूजा करने की सलाह दी.
जिसके बाद चंद्रदेव गुजरात में शिवलिंग की स्थापना कर के तपस्या करने लगे. चंद्रमा ने कई सालों तक घोर तपस्या की. जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने आर्शीवाद दिया कि श्रापमुक्त होना संभव नहीं है लेकिन हर 15 दिन बाद उनका तेज बढ़ जाएगा. इसके बाद भगवान शिव इसी जगह पर बस गए और अपने भक्तों के कष्ट को दूर करने लगे.