नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में एक युवक और IAS अधिकारी के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. युवक ने अधिकारी से मुलाकात के लिए अपॉइंटमेंट लेने की अनिवार्यता पर सवाल उठाया.
उसने कहा कि एक सरकारी अधिकारी जनता का सेवक होता है, न कि किसी निजी कंपनी का HR, जिससे मिलने के लिए पहले समय लेना पड़े. यह पूरा मामला उस आंदोलन के बीच सामने आया है, जिसमें मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने, सम्मान और न्याय की मांग की जा रही है.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में IAS अधिकारी एक कॉन्फ्रेंस टेबल पर बैठे दिखाई देते हैं. इसी दौरान वह नागपुर के युवक यश गोरखेड़े से पूछते हैं कि क्या उसने उनसे मिलने के लिए पहले अपॉइंटमेंट लिया था. इस पर यश ने तुरंत जवाब देते हुए कहा, 'कैसा अपॉइंटमेंट? आप जनता के सेवक हैं, किसी प्राइवेट कंपनी के HR नहीं. इसीलिए मैं बाहर खड़ा था.'
युवक का कहना था कि सरकारी अधिकारियों को आम नागरिकों के लिए सुलभ होना चाहिए. जनता को अपनी समस्याएं बताने के लिए इस तरह की औपचारिकताओं का सामना नहीं करना चाहिए.
IAS अधिकारी : क्या तुम्हारे पास appointment है , बाद में आना। आम आदमी : You are a public servant. तुम नौकर है , तुम ही नौकर है , तुम नौकर है। https://t.co/UNUQlMU8ey
— Akhilesh Tiwari (अखिलेश तिवारी) (@Akhilesh_tiwa) November 5, 2026
यह पूरा घटनाक्रम मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामने आया है. यश गोरखेड़े जन बदलाव पार्टी के संस्थापक हैं. यह एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जिसका मुख्य आधार महाराष्ट्र के नागपुर में है.
यश ने फेसबुक पर इस वीडियो को साझा किया. इसके साथ उन्होंने दावा किया कि मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी और ठेकेदार मजदूरों को परेशान कर रहे हैं.
यश ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि मजदूरों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जन बदलाव पार्टी मजदूरों को उचित मजदूरी, सम्मान और न्याय दिलाने की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि मजदूरों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा. जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक उनका अभियान जारी रहेगा.
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यश के सवाल उठाने के तरीके पर प्रतिक्रिया दी. कुछ यूजर्स ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिससे आम लोगों को लगे कि वे जनता के मालिक हैं. वहीं कुछ लोगों ने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए यश के आत्मविश्वास की सराहना की.
एक अन्य यूजर ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के अधिकारों के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को आगे आना चाहिए. फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.