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13 साल की उम्र में कर दी अपने भाई-बहन की हत्या, कोर्ट ने सुनाई 100 साल की सजा

13 साल के एक लड़के ने अपने दो भाई-बहनों की हत्या कर दी. अदालत ने उसकी कम उम्र पर विचार करने के बावजूद अपराध की कथित क्रूरता को देखते हुए उसे वयस्क के रूप में ट्रायल करने का फैसला किया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
13 साल की उम्र में कर दी अपने भाई-बहन की हत्या, कोर्ट ने सुनाई 100 साल की सजा
Courtesy: @IndiaDaily_24X7 X Account

एक बेहद गंभीर और दर्दनाक मामले में 13 साल के एक लड़के को अपने दो मासूम भाई-बहनों की हत्या का दोषी ठहराया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की कम उम्र पर विचार किया, लेकिन अपराध की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए उसे वयस्क के रूप में ट्रायल करने का फैसला किया गया.

कोर्ट में जब जज ने उसे 100 साल की जेल की सजा सुनाई, तो नाबालिग आरोपी जोर-जोर से रोने लगा. जज ने सजा सुनाते हुए कहा कि जिस पल उसने उन मासूम बच्चों की जान ली, उसी पल उसका बचपन खत्म हो गया. अदालत की इस टिप्पणी के बाद कोर्ट रूम में माहौल बेहद भावुक हो गया.

आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग 

मामले में आरोपी ने अपने दो छोटे भाई-बहनों की हत्या की थी. दोनों बच्चे उसके सौतेले भाई-बहन बताए गए हैं. घटना की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि इतनी कम उम्र के आरोपी के साथ किस तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए.

वयस्क के तौर पर ट्रायल 

जज ने आरोपी की उम्र को ध्यान में रखते हुए उसके मामले पर विचार किया, लेकिन अपराध की कथित क्रूरता को देखते हुए उसे वयस्क के तौर पर ट्रायल करने का फैसला किया. अदालत का मानना था कि अपराध की गंभीरता इतनी अधिक थी कि केवल आरोपी की कम उम्र के आधार पर उसे सामान्य किशोर न्याय प्रक्रिया का लाभ नहीं दिया जा सकता.

सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी भावुक होकर रोने लगा. जज ने उसकी उम्र और बचपन का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की हत्या करने के क्षण के साथ ही उसका बचपन समाप्त हो गया. अदालत की यह टिप्पणी मामले की सबसे भावुक बातों में से एक रही.

अपराध की गंभीरता 

यह मामला इस बात पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है कि बेहद कम उम्र में कोई बच्चा इतनी हिंसक वारदात को कैसे अंजाम दे सकता है. ऐसे मामलों में अदालतों के सामने अपराध की गंभीरता के साथ-साथ आरोपी की उम्र, मानसिक स्थिति और उसके भविष्य जैसे पहलुओं पर भी विचार करने की चुनौती रहती है.