नई दिल्ली: कई ऊंची इमारतों में आपने देखा होगा कि लिफ्ट में 12 के बाद सीधे 14 नंबर लिखा होता है. यानी 13वीं मंजिल का नंबर दिखाई नहीं देता. इसके पीछे आम तौर पर 13 नंबर को लेकर जुड़ा अंधविश्वास माना जाता है. कई लोग 13 को अशुभ मानते हैं और इसी वजह से डेवलपर बिल्डिंग की नंबरिंग में 13 को छोड़ देते हैं. हालांकि फ्लैट खरीदने वालों के लिए यह मामला सिर्फ अंधविश्वास तक सीमित नहीं है.
मुंबई के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में फहीम लकड़ावाला ने ऐसा ही एक फ्लैट खरीदा था. उन्हें बताया गया कि उनका फ्लैट 13वीं मंजिल पर है, लेकिन प्रॉपर्टी टैक्स के बिल में उसे 14वीं मंजिल के रूप में दर्ज किया गया. जब उन्होंने डेवलपर से इस अंतर के बारे में पूछा तो बताया गया कि 13 नंबर को अशुभ मानने की वजह से बिल्डिंग में 13 की जगह 14 नंबर का इस्तेमाल किया गया है.
मामला महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी MahaRERA तक पहुंचा. प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के कारण खरीदार को तत्काल राहत नहीं मिली. हालांकि अथॉरिटी ने माना कि बिल्डिंग की नंबरिंग मंजूर प्लान से अलग की गई थी. साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में इस नंबरिंग की वजह से फ्लैट मालिक को किसी तरह की परेशानी होती है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी डेवलपर की होगी.
जानकारों के अनुसार फ्लैट का नंबर और मंजिल की जानकारी सेल एग्रीमेंट, मंजूर बिल्डिंग प्लान, प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, बिजली और पानी के कनेक्शन तथा सोसायटी के दस्तावेजों में एक जैसी होनी चाहिए. अगर किसी दस्तावेज में फ्लैट 13वीं मंजिल पर है और दूसरे में 14वीं मंजिल पर दर्ज है तो आगे चलकर विवाद हो सकता है. बैंक होम लोन के समय दस्तावेजों में अंतर को लेकर सवाल उठा सकता है. प्रॉपर्टी बेचते समय भी खरीदार या बैंक अतिरिक्त जांच कर सकता है.
अगर डेवलपर 13 नंबर को नहीं रखना चाहता है तो नंबरिंग का फैसला बिल्डिंग प्लान तैयार करते समय ही स्पष्ट होना चाहिए. मंजूरी मिलने के बाद मनमाने तरीके से नंबर बदलना उचित नहीं माना जाता. कुछ मामलों में इस मंजिल को सर्विस एरिया, कॉमन एरिया या रिफ्यूज एरिया के तौर पर दिखाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए संबंधित मंजूरियों और दस्तावेजों में स्पष्ट जानकारी जरूरी है.
घर खरीदने से पहले राज्य के RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन और मंजूर बिल्डिंग प्लान जरूर देखें. जमीन से ऊपर तक वास्तविक मंजिलों की गिनती करें. सेल एग्रीमेंट, टैक्स रिकॉर्ड और सोसायटी के दस्तावेजों में फ्लोर नंबर मिलाएं. किसी भी अंतर की स्थिति में डेवलपर से लिखित स्पष्टीकरण लें और जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी वकील से सलाह लें.