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'मेरी नाक नहीं देश के मुद्दों पर बात करें', डेनमार्क की PM मेटे फ्रेडरिक्सन ने प्लास्टिक सर्जन को दिया ऐसा जवाब; पोस्ट VIRAL

मेटे फ्रेडरिक्सन ने प्लास्टिक सर्जन की नाक की सर्जरी की सलाह ठुकराई और कहा कि महिलाओं को रूप रंग नहीं, काम और नीतियों के आधार पर परखा जाना चाहिए.

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Edited By: Reepu Kumari
'मेरी नाक नहीं देश के मुद्दों पर बात करें', डेनमार्क की PM मेटे फ्रेडरिक्सन ने प्लास्टिक सर्जन को दिया ऐसा जवाब; पोस्ट VIRAL
Courtesy: Mette Frederiksen (Instagram)

नई दिल्ली: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन इन दिनों अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं. एक प्लास्टिक सर्जन ने उन्हें उनकी नाक पर मौजूद निशान को ठीक कराने की सलाह दी थी. प्रधानमंत्री ने इस अनचाही सलाह का जवाब देते हुए साफ कहा कि उन्हें अपनी नाक या रूप रंग को लेकर किसी सर्जिकल सलाह की जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उनसे बात करनी है तो देश और दुनिया से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की जाए.

प्लास्टिक सर्जन ने नाक के निशान पर दी सलाह

फ्रेडरिक्सन ने इंस्टाग्राम पर प्लास्टिक सर्जन के मैसेज का स्क्रीनशॉट साझा किया. हालांकि, उन्होंने सर्जन की पहचान सार्वजनिक नहीं की. मैसेज में उनकी नाक पर मौजूद एक छोटे निशान को ठीक कराने की पेशकश की गई थी. प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब उन्हें उनकी शक्ल सूरत को लेकर इस तरह की सलाह मिली हो.

उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों में लोग कभी उनके दांत, कभी बाल और कभी नाक को लेकर टिप्पणी करते रहे हैं. यहां तक कि उन्हें बोटॉक्स कराने की सलाह भी दी गई है. फ्रेडरिक्सन ने इस पूरे रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को इस तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है.

'मैं अपने शरीर को लेकर पूरी तरह सहज हूं'

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने अपने जवाब में कहा कि वह अपनी उम्र और शरीर को लेकर पूरी तरह सहज हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद दूसरे लोगों के रूप रंग को लेकर टिप्पणी नहीं करतीं और दूसरों से भी ऐसी ही उम्मीद रखती हैं. उनका संदेश केवल अपनी नाक को लेकर नहीं था, बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार पर भी सवाल उठाता है. उन्होंने कहा कि यदि कोई उनसे संपर्क करना चाहता है तो जरूर करे, लेकिन बातचीत उनकी नाक या चेहरे के बजाय किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर होनी चाहिए.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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महिलाओं को रूप रंग से आंकने पर सवाल

फ्रेडरिक्सन ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को कई बार उनके काम, फैसलों और नीतियों के बजाय उनकी शक्ल सूरत के आधार पर परखा जाता है. उनके मुताबिक, यह मानसिकता बदलने की जरूरत है. उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि हर इंसान के शरीर में कुछ न कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें पारंपरिक सुंदरता के पैमाने पर 'परफेक्ट' नहीं माना जाता. लेकिन यही छोटी छोटी खामियां किसी व्यक्ति की पहचान का हिस्सा भी होती हैं.

2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री

मेटे फ्रेडरिक्सन डेनमार्क की राजनीति की प्रमुख नेताओं में शामिल हैं. वह 2019 में देश की प्रधानमंत्री बनी थीं और डेनमार्क की दूसरी महिला प्रधानमंत्री हैं. अपने राजनीतिक कार्यकाल के दौरान वह कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर रही हैं. यूक्रेन के समर्थन और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख के विरोध में भी उनका सख्त रुख सामने आया है. अब उनकी चर्चा एक अलग वजह से हो रही है, जहां उन्होंने अपने रूप रंग को लेकर मिली बिना मांगी सलाह का सार्वजनिक रूप से जवाब दिया है.

नाक नहीं, काम पर हो चर्चा

फ्रेडरिक्सन का संदेश साफ है कि किसी महिला की सार्वजनिक पहचान को उसके चेहरे, शरीर या उम्र तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति के काम और विचारों पर चर्चा अधिक महत्वपूर्ण है. प्लास्टिक सर्जन की सलाह पर प्रधानमंत्री का जवाब सोशल मीडिया पर महिलाओं को उनके रूप रंग के आधार पर आंकने की बहस को फिर सामने ले आया है. उन्होंने अपनी बात के जरिए यह सवाल उठाया है कि क्या सार्वजनिक पद पर बैठी महिला के काम से ज्यादा उसके चेहरे की चर्चा जरूरी है.