menu-icon
India Daily
share--v1

इंसान भी बन सकते हैं Mutants! रिसर्च ने किया सुपर पावर हासिल करने के रास्ते का खुलासा!

Way To Achieve Superpowers: सुपर पावर को लेकर कई फिल्में बनाई गई हैं. इन फिल्मों में दिखाया जाता है कि कैसे कोई इंसान दुश्मन से समाज को बचाता है. उसके पास अजीब तरह की सुपर पावर आ जाती है. उसे भविष्य का एहसास हो जाता है. ऐसे इंसान को म्यूटेंट कहा जाता है. म्यूटेंट को लेकर डेली मेल ने एक कहानी छापी है. इस कहानी में कई ऐसी कहानियां जिसमें बताया गया है कि कैसे कोई बच्चा नियर डेथ एक्सपीरियंस का अनुभव करता है और फिर मौत को मात देकर वापस आ जाता है.

auth-image
India Daily Live
Mutants
Courtesy: Social Media

Way To Achieve Superpowers: अगर आपने सुपर पावर वाली फिल्में देखीं होगी तो ये खबर आपको और भी दिलचस्प लगने वाली है. दरअसल, अभी तक आपने सुपर पावर की कहानी फिल्मों में देखी होगी. इंसान को म्यूटेंट बनता दिखाया जाता है. लेकिन अब सच में इंसान सुपर पावर हासिल कर सकते हैं. ये थोड़ा अजीब लेकिन सच है. दरअसल, डॉक्टर पेनी सार्टोरी ने 8 साल तक इस विषय पर अध्ययन किया और इस निष्कर्ष पर पहुंची कि  जब कोई भी भी बच्चा नियर डेथ का अनुभव करता है तो उसके पास ऐसी सुपर पावर हासिल करने की शक्ति विकसित हो जाती है. हालांकि, जिसके अंदर ऐसी शक्तियां होती हैं उन्हें इस बात को इल्म होती ही नहीं.

इंसान के म्यूटेंट बनने की पीछे की कहानी के राज को जानने के लिए डॉक्टर पेनी सार्टोरी को 8 साल का वक्त लग गया. हम आगे बढ़ें इससे पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर ये  म्यूटेंट  होता क्या है?

क्या होता है म्यूटेंट?

म्यूटेंट का सीधा कनेक्शन सुपर पावर से है. वो पावर जो व्यक्ति को भविष्य में ले जाती है. भविष्य में क्या होने वाला है कि जानकारी देती हैं. उस जानकारी की मदद से इंसान अपने ऊपर आने वाले खतरे को टाल सकता है.

म्यूटैंट के ऊपर रिसर्च करने वाली डॉक्टर पेनी सार्टोरी की पुस्तक में कई कहानियां हैं. एक कहानी है कि एक 6 महीने के बच्चे का डॉक्टर इलाज कर रहे थे. वह लगभग मरने के करीब था. लेकिन बच गया. तीन साल बाद जब उसके माता-पिता ने कहा कि उसकी दादी मरने वाली हैं. तो 3 साल के बच्चे ने सवाल किया कि क्या वह उस सुरंग के जरिए भगवान से मिलने वाली हैं. उस सुरंग को बच्चे ने तब देखा था जब वह 6 महीने का था और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. वह बिस्तर पर था लेकिन असल में वो कहीं और ही था.

इस मामले में शोधकर्ताओं को यह बात पता चली की सुरंग उसके मृत्यु का अनुभव कराने वाली एक घटक है. इस तरह के कई और मामले भी देखे गए हैं.

4 साल के बच्चे ने सुपर पावर का किया अनुभव

टॉम नाम के एक लड़के के साथ यूं ही कुछ हुई. ब्रिटिश सैनिक गैरिक के 4 साल के बेटे के पेट में अचानक दर्द उठा. डॉक्टर ने पाया कि उसकी आंत में दिक्कत तो तुरंत ऑपरेशन किया. बच्चा बच गया. इलाज के कुछ दिन बाद उसके पिता ने पूछा कि तुम कहां जाना चाहते हो तो बच्चे ने जवाब दिया कि वह फिर से उसी पार्क में जाना चाहता है.

बच्चे के सवाल पर पिता ने पूछा किस पार्क में बच्चे ने बताया कि जब वह अस्पताल में गया था. वहां पर एक पार्क था, जहां बच्चे खेल रहे थे. वहां पर मैं गया तो एक आदमी ने मुझे रोक दिया और कहा कि उसे अभी पार्क के अंदर नहीं आना है. इसके बाद उसने वापस फिर से मुझे सुरंग के अंदर भेज दिया और फिर में वापस अस्पताल में आ गया .

आपको लग रहा होगा कि कैसे जिस बच्चे का इलाज चल रहा है वह पार्क और सुरंग में पहुंच सकता है. दरअसल, यह सब नियर डेथ एक्सपीरियंस की वजह से संभव हुआ.

क्या बोले रिसर्चर

बचपन में होने वाली नियर डेथ एक्सपीरियंस के सैकड़ों मामलों को इकट्ठा करने वाली शोधकर्ता डॉ. फिलिस मैरी एटवाटर कहती हैं कि कुछ लोगों ने अपने सुखद सपनों को वापस पाने के लिए आत्महत्या करने की कोशिश की. लेकिन ऐसे मामले बहुत ही रेयर  हैं.

डॉ. एटवाटर ने नियर डेथ एक्सपीरियंस को लेकर किए गए  अध्ययन के रिसर्च के अनुसार कहती हैं जब भी ऐसी घटनाएं छोटे उम्र के बच्चों के साथ होती है तो उनका रिश्ता किसी और के साथ लंबा चलता है लेकिन जब किसी वयस्क के साथ नियर डेथ एक्सपीरियंस होता है तो उनका रिश्ता टूट जाता है. नियर डेथ एक्सपीरियंस का अनुभव करना के दौरान जो भी चीजें आप देखते हैं वह आपके अंदर सुपर पावर होने का इशारा करती है.