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India Daily

45 हजार की नौकरी छोड़ बिना काम किए स्विट्जरलैंड में बिताए 6 महीने, भारतीय महिला ने बताया कामयाबी का 'सीक्रेट फॉर्मूला'

भारतीय मूल की स्नेह गौर ने 45,000 रुपए की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ स्पेनिश भाषा की बदौलत अपना रिमोट बिजनेस खड़ा किया और बिना किसी नौकरी के स्विट्जरलैंड में 6 महीने गुजारे.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
45 हजार की नौकरी छोड़ बिना काम किए स्विट्जरलैंड में बिताए 6 महीने, भारतीय महिला ने बताया कामयाबी का 'सीक्रेट फॉर्मूला'
Courtesy: instagram

अक्सर लोग वित्तीय सुरक्षा और सफलता का मतलब एक अच्छी कॉर्पोरेट नौकरी और समय पर मिलने वाले प्रमोशन को मानते हैं लेकिन भारतीय कंटेंट क्रिएटर स्नेह गौर ने इस पारंपरिक सोच को चुनौती दी है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में स्नेह ने साझा किया कि कैसे उन्होंने बिना किसी बंधी-बंधाई नौकरी के दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में 6 महीने बिताए. स्नेह ने बताया कि उनके इस सफर की शुरुआत तब हुई जब वह भारत में एक कॉर्पोरेट जॉब में हर महीने 45,000 रुपए कमा रही थीं. समय के साथ उन्हें अहसास हुआ कि उन्हें नौकरी में प्रमोशन नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जीने की आजादी चाहिए.

 एक नई भाषा ने बदली जिंदगी की दिशा

स्नेह के मुताबिक, कॉर्पोरेट की बंदिशों से निकलने के लिए उन्होंने स्पेनिश भाषा सीखने में निवेश किया. इस एक स्किल ने उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए दरवाजे खोल दिए, जिसके बाद वे स्पेन चली गईं. कुछ समय बाद उन्होंने इसी हुनर को एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदल दिया. स्नेह ने शुरुआत में स्पेनिश सिखाना शुरू किया और धीरे-धीरे अपने काम का दायरा बढ़ाते हुए स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने वाले युवाओं के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे कई अन्य क्षेत्रों में कदम रखा.

 'न कोई बॉस, न ऑफिस और न ही किसी की इजाजत'

कमाई के कई अलग-अलग साधन (मल्टीपल सोर्सेज ऑफ इनकम) तैयार करने के बाद स्नेह पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गईं. वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'कोई नौकरी नहीं, किसी कंपनी की सैलरी नहीं, फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंखें खुलती थीं.' उन्होंने कहा कि जब वह स्विट्जरलैंड शिफ्ट हुईं, तो वे किसी कंपनी पर निर्भर नहीं थीं, बल्कि उनका लैपटॉप और रिमोट टीम ही उनके काम के लिए काफी थी. स्नेह ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि कभी-कभी जीवन बदलने के लिए किसी पदोन्नति की नहीं, बल्कि एक सही हुनर (स्किल) की जरूरत होती है.