नई दिल्ली: PF का पैसा नौकरीपेशा लोगों की जमा पूंजी होती है और रिटायरमेंट के बाद इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. ऐसे में क्लेम करने के बाद लंबे समय तक भुगतान का इंतजार परेशानी बढ़ा सकता है. 29 जून 2026 से लागू नए नियमों के तहत पूरा और सही PF क्लेम मिलने पर उसके निपटारे के लिए 20 दिन की समयसीमा तय की गई है. यानी जरूरी दस्तावेज और सही जानकारी देने पर सामान्य तौर पर 20 दिन में प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए.
हालांकि हर मामले में 20 दिन के भीतर भुगतान होना तय नहीं माना जा सकता. अगर दस्तावेज अधूरे हैं, जानकारी में गलती है या किसी अतिरिक्त जांच की जरूरत है, तो क्लेम की स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए कर्मचारी के लिए जरूरी है कि वह आवेदन करते समय सभी जानकारी सही भरे और जरूरी कागजात उपलब्ध कराए. क्लेम जमा करने के बाद उसकी स्थिति पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण है.
नए नियमों में तय समयसीमा के भीतर क्लेम निपटाने को लेकर जिम्मेदारी का प्रावधान भी है. यदि संबंधित अधिकारी बिना पर्याप्त कारण के निर्धारित समय में क्लेम का निपटारा नहीं करता है, तो 12 प्रतिशत सालाना की दर से पेनल ब्याज लगाए जाने की व्यवस्था बताई गई है. यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूल किए जाने का प्रावधान है. इससे समय पर क्लेम निपटाने की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की गई है.
अगर पूरा PF क्लेम जमा करने के बाद 20 दिन बीत जाते हैं और मामला लंबित रहता है, तो कर्मचारी शिकायत का रास्ता अपना सकता है. क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के सामने शिकायत की जा सकती है. इसके अलावा EPFO की ऑनलाइन शिकायत सुविधा EPFiGMS के जरिए भी मामला उठाया जा सकता है. कर्मचारी अपनी समस्या EPFO के ‘निधि आपके निकट’ कार्यक्रम में भी रख सकता है, जो आम तौर पर हर महीने की 10 तारीख को आयोजित होता है.
मुंबई के एक मामले ने PF क्लेम में देरी को लेकर ध्यान खींचा है. उपभोक्ता आयोग के सामने आए मामले में रिटायर्ड कर्मचारी का PF क्लेम 14,06,272 रुपये का था. आयोग के अनुसार, इसके निपटारे में 35 दिन की देरी हुई. यह देरी 9 नवंबर से 13 दिसंबर 2016 के बीच रही. आयोग ने EPFO को इस राशि पर 35 दिन की देरी के लिए 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है.
आयोग के मुताबिक, मामले में जॉइंट डिक्लेरेशन आवेदन से जुड़ी समस्या की सही जानकारी नहीं दिए जाने के कारण क्लेम के निपटारे में देरी हुई. इसे सेवा में कमी माना गया. EPFO को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है. यह मामला खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए अहम है, क्योंकि कई लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें PF से मिलने वाली रकम पर निर्भर हो सकती हैं.
इस मामले का मतलब यह नहीं है कि हर PF क्लेम में देरी होने पर कर्मचारी को अपने आप 6 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल जाएगा. ब्याज या मुआवजे का फैसला मामले की परिस्थितियों और संबंधित आदेश पर निर्भर कर सकता है. इसलिए अगर आपका क्लेम अटका हुआ है, तो आवेदन की तारीख, जमा किए गए दस्तावेज, आई आपत्तियां और EPFO से हुई बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें. 20 दिन की समयसीमा पार होने पर उपलब्ध शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करना आपके लिए उपयोगी हो सकता है.